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पाकिस्तान में स्कूल वैन पर चलीं ताबड़तोड़ गोलियां, दो बच्चों की मौत; पांच घायल

Attack on Pakistan School Van: पाकिस्तान में स्कूल वैन पर बंदूकधारियों की गोलीबारी में दो बच्चों की मौत हो गई। ये वारदार पंजाब प्रांत की बताई जा रही है, कुछ अपराधियों ने एक स्कूल वैन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी में सात बच्चों के घायल होने की खबर आई, इनमें से दो की मौत हो गई।

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सांकेतिक तस्वीर। (साभार- Freepik)

Pakistan News: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बृहस्पतिवार को बंदूकधारियों ने एक स्कूल वैन पर गोलीबारी की, जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई और पांच अन्य लोग घायल हो गए। यह घटना लाहौर से लगभग 400 किलोमीटर दूर अटक जिले के ढेरी कोट इलाके में हुई। पुलिस के अनुसार, स्कूल वैन बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रही थी, इस दौरान अज्ञात बंदूकधारियों ने उस पर गोलीबारी की।

दो बच्चों की मौत, दो की हालत गंभीर

पुलिस ने बताया, 'हमले में पांच से 10 वर्ष की आयु के सात बच्चे घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य की हालत गंभीर बताई जा रही है।' उसने बताया कि वैन चालक को भी चोटें आई हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सरदार गयास गुल ने पत्रकारों को बताया कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से बंदूकधारियों को पकड़ने के लिए पुलिस टीमें गठित की गई हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस, चालक के किसी से दुश्मनी या फिर घटना के आतंकवाद से जुड़े होने समेत सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है।

मरियम नवाज ने घटना पर लिया संज्ञान

गृह मंत्री मोहसिन नकवी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने घटना पर संज्ञान लिया और कहा कि स्कूल वैन को निशाना बनाने के इस जघन्य अपराध में शामिल लोग न्याय के कटघरे से बच नहीं पाएंगे। मुख्यमंत्री ने पुलिस को हमलावरों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने स्कूली बच्चों पर हमले की निंदा की है।

(इनपुट- भाषा)

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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