Morocco Earthquake: मोरक्को में शुक्रवार की रात आए भूकंप ने ऐसी तबाही मचाई है कि चारों ओर हहाकार मचा हुआ है। 2 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और अभी भी बचाव कार्य जारी है। मोरक्को में लाशों के ढेर के बीच जीवन जीने के लिए लोग जद्दोजहद कर रहे हैं।
बढ़ सकती है मृतकों की संख्या
मोरक्को में आम तौर पर इतना शक्तिशाली भूकंप आता नहीं है। मोरक्को में यह अबतक का सबसे तेज भूकंप है। इस शक्तिशाली भूकंप के खौफ से लोग अपने बिस्तरों से उठकर सड़कों पर दौड़ने लगे। पहाड़ी गांवों और प्राचीन शहरों में इमारतें ढह गईं। 2122 लोग मारे गए। मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है, क्योंकि बचावकर्मियों को को दुर्गम दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
120 सालों में सबसे तेज भूकंप
उत्तरी अफ्रीकी देश मोरक्को में पिछले 120 वर्षों में आए सबसे तेज 6.8 तीव्रता के भूकंप ने सबकुछ बर्बाद करके रख दिया है। लोग पागलों की तरह अपनों को मलबों में खोजते दिखे हैं। सूखाग्रस्त उआर्गेन घाटी जैसे दूरदराज के गांव बिजली और फोन सेवा से दूर हो चुके हैं। स्थानीय मीडिया ने बताया कि भूकंप के केंद्र के आसपास के पर्वतीय क्षेत्र की ओर जाने वाले सड़क मार्ग अवरूद्ध हो जाने के कारण बचाव अभियान धीमा है। मोरक्को की सेना और आपात सेवा के कर्मी नुकसान से प्रभावित क्षेत्रों में सहायता की कोशिश कर रही हैं, लेकिन भूकंप के केंद्र के आसपास के पर्वतीय क्षेत्र की ओर जाने वाली सड़कें वाहनों और चट्टानों के मलबे से अवरुद्ध हो गईं, जिससे बचाव अभियान धीमा है।
भूकंप का केंद्र
अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि रात 11 बजकर 11 मिनट पर आए भूकंप की प्रारंभिक तीव्रता 6.8 थी और भूकंप बाद के झटके कई सेकंड तक महसूस किये गए। अमेरिकी एजेंसी ने 19 मिनट बाद भी 4.9 तीव्रता का झटका महसूस किये जाने की सूचना दी। शुक्रवार को आए इस भूकंप का केंद्र मराकेश से लगभग 70 किलोमीटर दक्षिण में अल हौज प्रांत के इघिल शहर में था। यूएसजीएस ने बताया कि भूकंप का केंद्र पृथ्वी की सतह से 18 किलोमीटर की गहराई में था, जबकि मोरक्को की भूकंप निगरानी एजेंसी के मुताबिक, इसका केंद्र आठ किलोमीटर गहराई में था।
1960 में जब आया था भूकंप
मोरक्को के अगादिर शहर के पास 1960 में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें हजारों लोगों की मौत हो गई थी। इस भूकंप के बाद मोरक्को में भवन निर्माण संबंधी नियमों में बदलाव किया गया था, लेकिन कई इमारतें, खासकर गांवों में मकान भूकंप रोधी नहीं हैं।
