दुनिया

क्या ताइवान को डरा रहा चीन या बना रहा कोई बड़ा प्लान? आसपास के क्षेत्रों में फिर देखे गए कई चीनी विमान और नौसैनिक पोत

China vs Taiwan: क्या चीन अपने दुश्मन देश ताइवान को चौतरफा घेरने का प्लान बना रहा है? ये सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं, क्योंकि बार-बार ताइवान ये दावा कर रहा है कि उसके क्षेत्र में चीनी जहाजों की घुसपैठ हो रही है। इसी बीच ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि उसने अपने क्षेत्र के आसपास 11 चीनी विमान, 6 जहाज, 3 आधिकारिक जहाज देखे।

Image

चीन vs ताइवान

World News: ताइवान के साथ चीन क्या करने वाला है, आखिर वो अपने दुश्मन देश को बार-बार आंखें क्यों दिखा रहा है? ऐसे तमाम सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं, क्योंकि ताइवान की ओर से बार-बार ये दावा किया जा रहा है कि चीनी विमान उनके वायुक्षेत्र में घुसपैठ कर रहे हैं। उनके आस पास चीन के नौसैनिक जहाज देखे जा रहे हैं। जिससे जुड़े आंकड़े भी ताइवान की ओर से लगातार साझा किए जा रहे हैं।

ताइवान के आसपास क्यों मंडरा रहे चीनी विमान और नौसैनिक पोत?

ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय (एमएनडी) ने रविवार को सुबह 6 बजे (यूटीसी+8) तक द्वीप के आसपास 11 चीनी विमान, 6 नौसैनिक पोत और 3 आधिकारिक जहाज देखे हैं। उनमें से पांच विमान मध्य रेखा को पार करके ताइवान के मध्य, दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) में प्रवेश कर गए।

X पर एक पोस्ट साझा करते हुए, MND ने लिखा, 'ताइवान के आस-पास 11 PLA विमान, 6 PLAN जहाज और 3 आधिकारिक जहाज आज सुबह 6 बजे (UTC+8) तक देखे गए। 5 उड़ानें मध्य रेखा को पार करके ताइवान के मध्य, दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी ADIZ में प्रवेश कर गईं। हमने स्थिति पर नज़र रखी है और तदनुसार प्रतिक्रिया दी है।'

शनिवार को, ताइवान के MND ने देश भर में 17 चीनी सैन्य विमान, आठ नौसैनिक जहाज और तीन सरकारी जहाज देखे।

लगातार ऐसी गतिविधियों में संलिप्त दिख रहा है चीन

ताइवान MND ने X पर लिखा, 'ताइवान के आसपास 17 PLA विमान, 8 PLAN जहाज और 3 आधिकारिक जहाज आज सुबह 6 बजे (UTC+8) तक देखे गए। 15 उड़ानें मध्य रेखा को पार करके ताइवान के उत्तरी, मध्य, दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी ADIZ में प्रवेश कर गईं। हमने स्थिति पर नज़र रखी और जवाब दिया।' हाल के हफ्तों में, चीन ने नए-नए नौसैनिक उपकरणों के साथ ताइवान के समुद्र तटों पर आक्रमण करने की अपनी क्षमता को स्पष्ट रूप से बढ़ाया है।

क्या ताइवान पर आक्रमण करने वाला है चीन?

इसमें एक विशाल लैंडिंग हेलीकॉप्टर हमला (LHA) पोत का औपचारिक लॉन्च शामिल है, जिसकी तरह दुनिया की किसी भी नौसेना के पास नहीं है, और समुद्र तट पर उतरने के दौरान जहाजों को उतारने में सहायता के लिए फ़्लोटिंग ब्रिज डॉक्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन शामिल है। दोनों प्रकार के उपकरण इस बात के पुख्ता संकेत हैं कि चीन एक दिन ताइवान पर आक्रमण करने के बारे में गंभीर है।

ताइवान-चीन मुद्दा ताइवान की संप्रभुता पर केंद्रित एक जटिल और दीर्घकालिक भू-राजनीतिक संघर्ष है। ताइवान, जिसे आधिकारिक तौर पर रिपब्लिक ऑफ चाइना (आरओसी) के रूप में जाना जाता है, अपनी सरकार, सेना और अर्थव्यवस्था का संचालन करता है, जो वास्तव में एक स्वतंत्र राज्य के रूप में कार्य करता है। हालांकि, चीन ताइवान को एक अलग प्रांत मानता है और 'एक चीन' नीति पर जोर देता है, जो इस बात पर जोर देता है कि केवल एक चीन है, जिसकी राजधानी बीजिंग है।

क्या कहता है चीन और ताइवान का इतिहास?

इसने दशकों के तनाव को बढ़ावा दिया है, खासकर चीनी गृह युद्ध (1945-1949) के बाद से, जब माओत्से तुंग के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ने मुख्य भूमि चीन पर नियंत्रण कर लिया था, तब आरओसी सरकार ताइवान में वापस चली गई थी। बीजिंग ने ताइवान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य दबाव का उपयोग करते हुए लगातार ताइवान के साथ पुनर्मिलन के अपने लक्ष्य को व्यक्त किया है। इस बीच, अपनी आबादी के एक महत्वपूर्ण हिस्से द्वारा समर्थित ताइवान अपनी स्वतंत्रता को बनाए रखना जारी रखता है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article