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क्या ताइवान के खिलाफ कोई बड़ा प्लान बना रहा है चीन? फिर नजर आए कई चीनी विमान और नौसेना के जहाज

China vs Taiwan: चीन और ताइवान की आपसी तकरार से दुनिया वाकिफ है। ताइवान ने अपने तटों के पास 18 चीनी विमानों और 7 नौसेना जहाजों को संचालित होते हुए देखा। सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या अपने पड़ोसी देश ताइवान के खिलाफ चीन कोई बड़ा प्लान बना रहा है या फिर वो सिर्फ आंख दिखा रहा है।

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ताइवान ने अपने तटों के पास 18 चीनी विमानों और 7 नौसेना जहाजों की गतिविधि देखी।

क्या चीन अपने दुश्मन देश ताइवान को आंख दिखा रहा है या फिर उसके खिलाफ कोई बड़ी प्लानिंग कर रहा है? ये सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं, क्योंकि ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि शुक्रवार को सुबह 6 बजे (स्थानीय समय) तक ताइवान ने 18 चीनी विमानों की उड़ानों और सात चीनी जहाजों के संचालन का पता लगाया है। एमएनडी के अनुसार, 18 उड़ानों में से 13 ने मध्य रेखा को पार किया और ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी एडीआईजेड में प्रवेश किया।

ताइवान के तटों के पास देख गए 18 चीनी विमान और 7 नौसेना जहाज

बयान में ये भी कहा गया है कि 'ताइवान के आसपास संचालित पीएलए विमानों और 7 पीएलए जहाजों की 18 उड़ानें आज सुबह 6 बजे (यूटीसी+8) तक देखी गईं। 18 उड़ानों में से 13 ने मध्य रेखा को पार किया और ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी एडीआईजेड में प्रवेश किया। हमने स्थिति पर नज़र रखी है और उसके अनुसार प्रतिक्रिया दी है।'

ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि इससे पहले गुरुवार को ताइवान ने सुबह 6 बजे (स्थानीय समय) तक चीनी विमानों, छह चीनी जहाजों और एक चीनी गुब्बारे की 27 उड़ानें देखीं। MND के अनुसार, 27 उड़ानों में से 20 ने मध्य रेखा को पार किया और ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी ADIZ में प्रवेश किया।

जब चीनी विमानों ने ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी ADIZ में किया प्रवेश

X पर एक पोस्ट में, ताइवान के MND ने कहा, 'ताइवान के आसपास संचालित PLA विमानों और 6 PLAN जहाजों की 27 उड़ानें आज सुबह 6 बजे (UTC+8) तक देखी गईं। 27 उड़ानों में से 20 ने मध्य रेखा को पार किया और ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी ADIZ में प्रवेश किया। इस समयावधि के दौरान 1 PRC गुब्बारा देखा गया।'

इससे पहले दिन में, यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ़ स्टेट के एक प्रवक्ता ने ताइवान के पास चीन के हालिया सैन्य अभ्यासों की कड़ी आलोचना की, उन्हें 'बेशर्म और गैर-जिम्मेदाराना धमकियां' कहा, जबकि ताइपे (राजधानी शहर) के लिए यूनाइटेड स्टेट्स के लंबे समय से चले आ रहे समर्थन की पुष्टि की, जैसा कि ताइपे टाइम्स ने रिपोर्ट किया है।

चीन की इस हरकत के बाद अमेरिका ने जमकर सुनाई खरी-खोटी

प्रवक्ता ने कहा, 'चीन ताइवान के प्रति बेशर्मी और गैर-जिम्मेदाराना धमकियां देते हुए 'अशांत दुनिया में स्थिरता के लिए ताकत' होने का विश्वसनीय दावा नहीं कर सकता।' ताइपे टाइम्स के अनुसार, अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि ताइवान के प्रति वाशिंगटन की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता 45 वर्षों की तरह बनी रहेगी और अमेरिका 'चीन के सैन्य, आर्थिक, सूचनात्मक और कूटनीतिक दबाव के जवाब में ताइवान का समर्थन करता रहेगा।'

प्रवक्ता ने कहा, 'अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर हम ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता की पुरजोर वकालत करते हैं और बल या जबरदस्ती के माध्यम से यथास्थिति को बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध करते हैं।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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