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VIDEO: 421 KM की ऊंचाई पर लहराया तिरंगा! ISS को नमन कर रहे शुभांशु शुक्ला, AXIOM-4 की सफलतापूर्वक हुई डॉकिंग

AXIOM-4 Docking: एक्सिओम-4 मिशन के तहत स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल की गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर सफलतापूर्वक डॉकिंग हुई। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और अन्य तीन को लेकर फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा लॉन्च हुआ 'ड्रैगन' कैप्सूल भारतीय समयानुसार शाम 4:01 बजे अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ा।

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आईएसएस से जुड़ा ड्रैगन कैप्सूल (फोटो साभार: @SpaceX)

Photo : Twitter

AXIOM-4 Docking: एक्सिओम-4 मिशन के तहत स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल की गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर सफलतापूर्वक डॉकिंग हुई। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और अन्य तीन को लेकर फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा लॉन्च हुआ 'ड्रैगन' कैप्सूल भारतीय समयानुसार शाम 4:15 बजे अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ा। एक्सिऑम-4 मिशन का नेतृत्व कमांडर पैगी व्हिटसन कर रही हैं, जिसमें शुभांशु शुक्ला मिशन पायलट हैं और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री टिबोर कपू व पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की मिशन विशेषज्ञ हैं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अंतरिक्ष यान उस समय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ा, जब यह भारतीय समयानुसार अपराह्न 4:01 बजे उत्तरी अटलांटिक महासागर के ऊपर से गुजर रहा था। यह पहली बार है जब कोई भारतीय अंतरिक्ष यात्री आईएसएस की यात्रा पर गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के एक लाइव वीडियो में स्पेस स्टेशन को अंतरिक्ष स्टेशन के पास आते हुए दिखाया गया और 'डॉकिंग' प्रक्रिया भारतीय समयानुसार शाम 4:15 बजे पूरी हुई।

ISS में कब तक रहेंगे शुभांशु?

भारत का सीना गर्व से चौड़ा करने वाले शुभांशु शुक्ला आईएसएस पर 14 दिन व्यतीत करेंगे। इस मिशन के साथ ही शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बन गए। राकेश शर्मा को सबसे पहले अंतरिक्ष की यात्रा करने का गौरव हासिल हुआ था। उन्होंने 1984 में सोवियत संघ के सैल्यूट-7 स्टेशन पर 8 दिन गुजारे थे।

अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की खासियत

आईएसएस पर दो बाथरूम और छह स्लीपिंग रूम है, जिसका सभी अंतरिक्ष यात्री क्रमबद्ध तरीके से इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, भोजन और पानी का बड़ी सावधानी के साथ इस्तेमाल करना होता है, क्योंकि 421 किमी ऊपर मौजूद स्पेस स्टेशन में इसकी सप्लाई पृथ्वी से की जाती है। आईएसएस में रहने वाले अंतरिक्ष यात्री डेढ़ घंटे के अंतराल में सूर्यास्त और सूर्योदय को देखते हैं। ऐसे में उन्हें हर 90 मिनट में यह नजारा देखने की आदत डालनी पड़ती है।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ता author

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स ... और देखें

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