दुनिया

बांग्लादेश में 14 से 17 नवंबर तक बंद की घोषणा, शेख हसीना की पार्टी करेगी अंतरिम PM यूनुस के इस्तीफे की मांग

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 'जुलाई चार्टर कार्यान्वयन आदेश' पर हस्ताक्षर कर दिए जिसे यूनुस की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय सहमति आयोग ने तैयार किया है। यह मसौदा कई राजनीतिक दलों से विस्तृत परामर्श के बाद तैयार किया गया लेकिन अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अब भंग की जा चुकी अवामी लीग इससे बाहर रही।

Image

शेख हसीना की पार्टी बांग्लादेश के अंतरिम PM यूनुस के इस्तीफे की मांग को लेकर करेगी विरोध प्रदर्शन (AP)

Bangladesh News: भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में तख्तापलट करते हुए सत्ता में काबिज हुए मुहम्मद यूनुस से इस्तीफे की मांग हो रही है। पूर्व पीएम शेख हसीना की अवामी लीग ने मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के इस्तीफे की मांग की है। इस बीच पार्टी ने 14 से 17 नवंबर तक बांग्लादेश में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन और बंद की घोषणा की है।

बांग्लादेश ने जनमत-संग्रह पर अध्यादेश जारी किया

इस बीच बांग्लादेश ने बृहस्पतिवार देर रात एक अध्यादेश जारी किया, जो अंतरिम सरकार के प्रमुख प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस द्वारा प्रस्तावित राजनीतिक चार्टर पर जनमत-संग्रह के अनुरूप है। इस कदम पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए संवैधानिक विशेषज्ञों ने इसे 'असंवैधानिक' करार दिया है।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 'जुलाई चार्टर कार्यान्वयन आदेश' पर हस्ताक्षर कर दिए जिसे यूनुस की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय सहमति आयोग ने तैयार किया है। यह मसौदा कई राजनीतिक दलों से विस्तृत परामर्श के बाद तैयार किया गया लेकिन अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अब भंग की जा चुकी अवामी लीग इससे बाहर रही।

यूनुस का प्लान

राष्ट्र के नाम दिए अपने संबोधन में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार यूनुस ने बृहस्पतिवार को कहा कि अगले वर्ष फरवरी में प्रस्तावित राष्ट्रीय चुनाव के साथ ही जनमत-संग्रह कराया जाएगा ताकि जनता से चार्टर पर जनादेश लिया जा सके।

प्रमुख संवैधानिक विशेषज्ञ और पूर्व कानून प्रोफेसर शाहदीन मलिक ने कहा, 'चार्टर में शामिल कई फैसले वर्तमान संविधान के विपरीत हैं और चूंकि संविधान अब भी लागू है तो राष्ट्रपति इस आदेश पर कानूनी रूप से हस्ताक्षर नहीं कर सकते। बांग्लादेश के संविधान में जनमत-संग्रह का कोई प्रावधान नहीं है और अनुच्छेद 93 के अनुसार कोई भी अध्यादेश संविधान में संशोधन या निरस्तीकरण के लिए जारी नहीं किया जा सकता।'

अध्यादेश के अनुसार, अगली संसद को अपनी पहली बैठक से 180 कार्यदिवस के भीतर चार्टर और जनमत-संग्रह के परिणामों के अनुरूप संविधान संशोधन पूरा करना होगा। मलिक ने इसे 'असंगत' बताया। उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील मोहम्मद रूहुल कुद्दूस ने भी पूछा कि संविधान में जनमत-संग्रह का प्रावधान ही नहीं है तो इसे किस कानूनी आधार पर कराया जा सकता है।

जनमत-संग्रह की वैधता संदिग्ध

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने आरोप लगाया कि यूनुस ने स्वयं अपने हस्ताक्षर वाले चार्टर का उल्लंघन किया है क्योंकि उसमें संवैधानिक सुधार परिषद जैसी नयी बातें थोपने का प्रावधान नहीं था। बीएनपी के नेता सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि जुलाई चार्टर कार्यान्वयन आदेश में कई नए बिंदु जोड़े गए हैं और कई सहमत बिंदु हटाए गए हैं इसलिए जनमत-संग्रह की वैधता संदिग्ध हो गई है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

और पढ़ें
End of Article