Marco Rubio UNGA Statement: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वैश्विक निकायों और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रुबियो ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाएं अपने मूल जनादेश से भटक चुकी हैं, जिसके कारण वे भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित तनाव जैसे गंभीर मुद्दों को सुलझाने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में कोई भी ऐसी क्रियाशील अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था मौजूद नहीं है जो वैश्विक संघर्षों का समाधान निकाल सके।
'अपने जनादेश से भटक चुकी हैं वैश्विक संस्थाएं': मार्को रुबियो
संवाददाताओं से बातचीत करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में शामिल दुनिया के कई नेताओं के बीच इस बात को लेकर आम सहमति है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय ढांचा टूट चुका है:
भटकाव का आरोप: रुबियो ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन यह अपनी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि यह संस्था अपने तय जनादेश से परे जाकर उन मामलों में उलझ गई है, जिनसे इसका कोई सीधा लेना-देना नहीं होना चाहिए।
विवादों के उदाहरण: उन्होंने कहा कि यदि हमारे पास एक प्रभावी वैश्विक व्यवस्था होती, तो वह थाईलैंड-कंबोडिया के बीच हुए युद्ध या भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्षों को आसानी से सुलझा सकती थी। लेकिन आज ऐसी कोई व्यवस्था काम नहीं कर रही है।
राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय तंत्र की नाकामी के चलते देश अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार काम करने को मजबूर हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका हमेशा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा।
डोनाल्ड ट्रंप के दावे और भारत का रुख
मार्को रुबियो की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक एक दिन बाद आई है, जिसमें ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए एक बार फिर दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रुकवाया था।
ट्रंप का दावा: ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि वाशिंगटन की मध्यस्थता के बाद भारत और पाकिस्तान पूरी तरह से युद्धविराम पर सहमत हुए थे।
भारत का स्पष्ट रुख: भारत सरकार ने ट्रंप के इन दावों को हमेशा खारिज किया है। भारत का रुख साफ और अडिग रहा है कि पाकिस्तान के साथ सैन्य अभियानों के महानिदेशक (DGMOs) के स्तर पर सीधी बातचीत के बाद ही गोलाबारी रोकने पर सहमति बनी थी। भारत ने इस मामले में किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से साफ इनकार किया है।
