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बेलारूस पहुंचे रूसी परमाणु हथियार: यूक्रेन बॉर्डर पर तैनात हथियारों की रेंज कितनी, आखिर Vladimir Putin का क्या है प्लान?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 17, 2023, 10:19 AM IST

Russian Nuclear weapons: बेलारूसी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने पिछले सप्ताह कहा था कि उनके देश को रूस से बम और मिसाइल का पहला भाग प्राप्त हुआ है। लुकाशेंको ने कहा था, हमारे पास मिसाइल और बम हैं जो हमें रूस से प्राप्त हुए हैं। ये बम हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए बमों की तुलना में तीन गुना अधिक शक्तिशाली हैं।

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व्लादिमीर पुतिन

Photo : AP

Russian Nuclear weapons: रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग के बीच रूस ने अपने परमाणु हथियारों को बेलारूस में तैनात कर दिया है। इसकी पुष्टि खुद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा की गई है। द हिल के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को कहा कि मास्को ने बेलारूस को परमाणु हथियारों का अपना पहला बैच भेजा दिया है। उन्होंने, सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि बाकी परमाणु हथियार गर्मियों के अंत तक डिलीवर कर दिए जाने चाहिए।

1991 के बाद यह पहली बार है, जब रूस ने अपने परमाणु हथियारों को विदेशी धरती पर तैनात किया है। इनकी तैनाती के साथ ही व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को एक चेतावनी भी दी है। युद्ध में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के बारे में एक सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा है कि यह उन सभी लोगों के खिलाफ एक निवारक उपाय है जो रूस और उसकी रणनीतिक हार के बारे में सोचते हैं।

कितने शक्तिशाली हैं हथियार

बेलारूसी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने पिछले सप्ताह कहा था कि उनके देश को रूस से बम और मिसाइल का पहला भाग प्राप्त हुआ है। लुकाशेंको ने रूसी और बेलारूसी राज्य मीडिया से कहा, हमारे पास मिसाइल और बम हैं जो हमें रूस से प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा, हमें जो हथियार प्राप्त हुए हैं, वे बम हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए बमों की तुलना में तीन गुना अधिक शक्तिशाली हैं। बता दें, रूस और बेलारूस के बीच बीते मार्च में परमाणु हथियारों की तैनाती के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

बेलारूस में क्यों तैनात किए गए रूसी परमाणु हथियार

इसकी खास वजह बेलारूस की भौगोलिक स्थिति और पुतिन और बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के बीच दोस्ती है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद भी बेलारूस ने इस युद्ध में रूस के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दरअसल, बेलारूस को रूस के प्रमुख सहयोगी देश के रूप में देखा जाता है। बीते साल फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद बेलारूस को रूस ने यूक्रेन पर हमले के लिए बेलारूस को लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल किया था।

बेलारूस में तैनात हथियारों की रेंज क्या

रूस ने कहा है कि बेलारूस में तैनात की गई मिलाइलें लंबी दूरी के रणनीतिक हथियार नहीं हैं। ये टेक्टिकल मिसाइलें हैं। बेलारूस के राष्ट्रपति ने भी कहा है कि इस्कांडर रॉकेट की मारक क्षमता 500 किलोमीटर या इससे कुछ अधिक हैं। उन्होंने स्पष्ट कि यहा है कि उनकी योजना अमेरिका से लड़ने की नहीं है। बता दें, रूस ने भले ही बेलारूस में इन हथियारों की तैनाती की हो, लेकिन समझौते के तहत हथियारों का पूरा कंट्रोल अभी भी मॉस्को के पास ही है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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