Russian Nuclear weapons: रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग के बीच रूस ने अपने परमाणु हथियारों को बेलारूस में तैनात कर दिया है। इसकी पुष्टि खुद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा की गई है। द हिल के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को कहा कि मास्को ने बेलारूस को परमाणु हथियारों का अपना पहला बैच भेजा दिया है। उन्होंने, सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि बाकी परमाणु हथियार गर्मियों के अंत तक डिलीवर कर दिए जाने चाहिए।
1991 के बाद यह पहली बार है, जब रूस ने अपने परमाणु हथियारों को विदेशी धरती पर तैनात किया है। इनकी तैनाती के साथ ही व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को एक चेतावनी भी दी है। युद्ध में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के बारे में एक सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा है कि यह उन सभी लोगों के खिलाफ एक निवारक उपाय है जो रूस और उसकी रणनीतिक हार के बारे में सोचते हैं।
कितने शक्तिशाली हैं हथियार
बेलारूसी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने पिछले सप्ताह कहा था कि उनके देश को रूस से बम और मिसाइल का पहला भाग प्राप्त हुआ है। लुकाशेंको ने रूसी और बेलारूसी राज्य मीडिया से कहा, हमारे पास मिसाइल और बम हैं जो हमें रूस से प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा, हमें जो हथियार प्राप्त हुए हैं, वे बम हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए बमों की तुलना में तीन गुना अधिक शक्तिशाली हैं। बता दें, रूस और बेलारूस के बीच बीते मार्च में परमाणु हथियारों की तैनाती के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
बेलारूस में क्यों तैनात किए गए रूसी परमाणु हथियार
इसकी खास वजह बेलारूस की भौगोलिक स्थिति और पुतिन और बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के बीच दोस्ती है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद भी बेलारूस ने इस युद्ध में रूस के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दरअसल, बेलारूस को रूस के प्रमुख सहयोगी देश के रूप में देखा जाता है। बीते साल फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद बेलारूस को रूस ने यूक्रेन पर हमले के लिए बेलारूस को लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल किया था।
बेलारूस में तैनात हथियारों की रेंज क्या
रूस ने कहा है कि बेलारूस में तैनात की गई मिलाइलें लंबी दूरी के रणनीतिक हथियार नहीं हैं। ये टेक्टिकल मिसाइलें हैं। बेलारूस के राष्ट्रपति ने भी कहा है कि इस्कांडर रॉकेट की मारक क्षमता 500 किलोमीटर या इससे कुछ अधिक हैं। उन्होंने स्पष्ट कि यहा है कि उनकी योजना अमेरिका से लड़ने की नहीं है। बता दें, रूस ने भले ही बेलारूस में इन हथियारों की तैनाती की हो, लेकिन समझौते के तहत हथियारों का पूरा कंट्रोल अभी भी मॉस्को के पास ही है।
