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पहली बार जेलेंस्की ने मानी यूक्रेन की कमजोरी! बताया- रूस के खिलाफ जवाबी हमले में क्यों लग रहा वक्त

  • Edited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 11, 2023, 07:10 PM IST

Russia Ukraine War: जेलेंस्की ने बीबीसी को दिए साक्षात्कार में दावा किया कि मौजूदा समय में जवाबी हमला करने से भारी जनहानि हो सकती है। उन्होंने कहा है कि अगर हम अभी जवाबी हमला करते हैं तो हमें भारी संख्या में लोगों को खोना पड़ सकता है और मुझे लगता है कि यह अस्वीकार्य है।

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वोलोदिमिर जेलेंस्की

Photo : BCCL

Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के खिलाफ बीते 14 महीनों से जंग जारी है। दोनों मुल्कों को इस युद्ध में भीषण नुकसान हो चुका है। हजारों लोग अब तक मारे जा चुके हैं, इसके बावजूद यह जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि इस जंग में यूक्रेन जवाबी हमले की तैयारी कर रहा है। हालांकि, यूक्रेन की ओर से यह हमला कब किया जाएगा इसकी कोई सटीक जानकारी नहीं है।

इस बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पहली बार माना है कि रूस के सामने यूक्रेन काफी कमजोर है। एक इंटरव्यू में उन्होंने इस बाती को स्वीकार करते हुए कहा है कि रूस पर जवाबी हमला करने और रूसी सेना को पीछे धकेलने के लिए उन्हें और समय चाहिए।

क्यों डर रहे हैं जेलेंस्की

जेलेंस्की ने बीबीसी को दिए साक्षात्कार में दावा किया कि मौजूदा समय में जवाबी हमला करने से भारी जनहानि हो सकती है। उन्होंने कहा है कि हमारे पास जो कुछ भी है, हम उसे ही लेकर आगे बढ़ रहे हैं। यह भी निश्चित है कि हम कामयाब होंगे, लेकिन अगर हम अभी जवाबी हमला करते हैं तो हमें भारी संख्या में लोगों को खोना पड़ सकता है और मुझे लगता है कि यह अस्वीकार्य है।

यूक्रेन को अभी इंतजार करने की जरूरत

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, हमें इंतजार करने की जरूरत है। रूस के खिलाफ हमें अभी और वक्त चाहिए। उन्होंने कहा, यूक्रेन टैंक और वायु रक्षा प्रणाली समेत उन्नत पश्चिमी हथियार प्राप्त कर रहा है। साथ ही पश्चिमी देशों की तरफ से यूक्रेनी सैनिकों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि मौसम के हालात सामान्य होने पर यूक्रेन की तरफ से जवाबी हमला किया जा सकता है लेकिन इसके सही समय को लेकर कोई सटीक जानकारी सामने नहीं आई है। पिछले कुछ सप्ताह से रूस के खिलाफ यूक्रेन के आक्रामक जवाबी हमले की संभावना जताई जा रही है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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