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'इन इलाकों को तुरंत छोड़ दें...' रूस में भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी, पुतिन ने लगाई इमरजेंसी

Russia Ukraine War: ​रूसी धरती पर छह अगस्त को शुरू हुए यूक्रेन के आश्चर्यजनक हमले ने क्रेमलिन को हिलाकर रख दिया है। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि यूक्रेन का कुर्स्क अभियान द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद रूस पर सबसे बड़ा हमला है और इसमें बख्तरबंद वाहनों तथा तोपखाने से लैस 10 हजार से अधिक यूक्रेनी सैनिक शामिल हो सकते हैं।

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रूस-यूक्रेन युद्ध

Photo : iStock

Russia Ukraine War: यूक्रेन और रूस के बीच जंग एक बार फिर तेज हो गई है। दोनों देशों के बीच खास तौर पर बेलगोरोद, कुर्स्क और ब्रायंस्क क्षेत्र को निशाना बनाया गया है। इस बीच रूस में भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। दूतावास की ओर से कहा गया है कि बेलगोरोद, कुर्स्क और ब्रायंस्क क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागिरकों को आवश्यक सावधानी बरतने की जरूरत है।

इसके साथ ही भारतीय दूतावास ने कहा है कि हाल ही में हुई सुरक्षा घटनाओं के मद्देनजर विशेष सुरक्षा उपाय करने की जरूरत है और अस्थायी रूप से इन क्षेत्रों से बाहर चले जाने की सलाह दी जाती है। बता दें, बीते छह अगस्त से यूक्रेन ने रूसी धरती पर हमले तेज कर दिए हैं, जिस कारण बहुत से लोगों को विस्थापित होना पड़ा है।

बेलगोरोद में लगाई गई इमरजेंसी

रूस के बेलगोरोद सीमा क्षेत्र में यूक्रेन की सेना की जबरदस्त गोलाबारी के कारण बुधवार को आपातकाल घोषित कर दिया गया, क्योंकि यूक्रेनी सेना लगातार दूसरे सप्ताह निकटवर्ती कुर्स्क क्षेत्र में सीमा पार से बड़े पैमाने पर घुसपैठ की कोशिश कर रही है। इस बीच, यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उनके देश का रूसी क्षेत्र पर कब्जा करने का कोई इरादा नहीं है।

हजारों लोगों ने छाड़ा घर

इस बीच बेलगोरोद के गवर्नर व्याचेस्लाव ग्लैदकोव ने क्षेत्र की स्थिति को बेहद कठिन और तनावपूर्ण बताया क्योंकि हमलों में घर नष्ट हो गए हैं तथा आम लोग हताहत हुए हैं। उन्होंने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि विशेष रूप से बच्चों को सुरक्षित स्थानों की ओर ले जाया जा रहा है। ग्लैदकोव ने बताया कि लगभग 5,000 बच्चे सुरक्षित क्षेत्रों में शिविरों में हैं। उन्होंने कल कहा था कि लगभग 11,000 लोग अपना घर छोड़कर भाग गए हैं, जिनमें से लगभग 1,000 लोग अस्थायी आवास केंद्रों में रह रहे हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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