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रूस और यूक्रेन के बीच बन गई बात! दोनों देशों ने सैकड़ों कैदियों की अदला-बदली की

युद्ध के संकट से जूझ रही दुनिया के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। रूस और यूक्रेन में युद्ध-विराम के प्रयासों के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया। रूस और यूक्रेन ने सैकड़ों कैदियों की अदला-बदली की। युद्धबंदियों और पकड़े गए नागरिकों को रिहा करना शांति की दिशा में एक बेहतर कदम साबित हो सकता है।

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रूस और यूक्रेन ने सैकड़ों कैदियों की अदला-बदली की।

Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन ने बुधवार को कहा कि उन्होंने 175-175 कैदियों की अदला-बदली की है। दोनों देशों के बीच तीन वर्ष पहले शुरू हुए युद्ध के बाद यह पहली बार है जब इन देशों ने इतनी बड़ी संख्या में कैदियों की अदला बदली की है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा, 'हम सशस्त्र बलों, नौसेना, नेशनल गार्ड, प्रादेशिक रक्षा बलों आदि में सेवाएं देते हुए हमारी स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ने वाले सैनिकों, सार्जेंट और अधिकारियों को वापस ला रहे हैं।'

संघर्ष विराम से पहले कितनी अहम है ये अदला-बदली

यूक्रेनी नेता ने इससे पहले कहा था कि सभी युद्धबंदियों और पकड़े गए नागरिकों को रिहा करना शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा और इससे दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली में मदद मिलेगी। उन्होंने कई बार सभी कैदियों की अदला-बदली की मांग की थी। यूक्रेन ने कैदियों की अदला-बदली किए जाने की जानकारी ऐसे वक्त पर दी है जब अस्थायी संघर्ष विराम के बारे में बातचीत जारी है।

ट्रंप से बातचीत के वक्त किया था कैदियों को रिहा करने का वादा

दोनों युद्धरत देशों की उत्तरी सीमा के निकट यह अदला-बदली होने के कुछ ही देर बाद, कई परिवार यूक्रेन के चेर्नीहीव क्षेत्र के एक अस्पताल में पहुंच गए जहां कैदियों को लाया जाना था। कुछ देर बाद कई बसें अस्पताल परिसर में आईं और उनमें से कमजोर और थके प्रतीत होते सैनिक वाहनों से बाहर निकले। वाहनों से निकलने के दौरान से इनके चेहरे अपने लोगों को परिसर में मौजूद देखकर खिल उठे।

इससे पहले रूस के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को कहा था कि उसने गंभीर रूप से घायल 22 अतिरिक्त यूक्रेनी बंदियों को 'सद्भावना के तौर पर' रिहा किया है। जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें एक अलग वार्ता प्रक्रिया के माध्यम से वापस किया गया। माना जा रहा है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अस्थायी संघर्ष विराम के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के वक्त 23 कैदियों को रिहा करने का वादा किया था। संख्या में बदलाव के कारण पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई।

युद्धबंदियों के उपचार के लिए यूक्रेन के समन्वय मुख्यालय के प्रेस कार्यालय के प्रमुख पेट्रो यात्सेंको ने कहा कि कैदियों के आदान-प्रदान के लिए व्यापक तैयारी की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, 'ये अदला-बदली अचानक होने वाली घटनाएं नहीं हैं। इनके लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाने की जरूरत होती है।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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