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बदल सकती है पाकिस्तान की किस्मत, समुद्री सीमा में मिला पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का चौथा सबसे बड़ा भंडार

Pakistan News: भौगोलिक सर्वेक्षण से पाकिस्तान को भंडार के स्थान की पहचान करने में मदद मिली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह दुनिया में चौथा सबसे बड़ा तेल और गैस भंडार है। अगर ऐसा होता है तो देश की आर्थिक किस्मत बदलने में मदद मिल सकती है।

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ।

Photo : BCCL

Pakistan News: पाकिस्तान की समुद्री सीमा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का एक बड़ा भंडार मिला है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह भंडार इतना बड़ा है कि इसके दोहन से पड़ोसी देश की किस्मत बदल सकती है।डॉन न्यूज टीवी ने शुक्रवार को एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि तेल और गैस भंडार की मौजूदगी की पुष्टि के लिए एक मित्र देश के सहयोग से तीन साल तक सर्वेक्षण किया गया था।

भौगोलिक सर्वेक्षण से पाकिस्तान को भंडार के स्थान की पहचान करने में मदद मिली। संबंधित विभागों ने सरकार को पाकिस्तानी समुद्री सीमा में तेल संसाधनों के बारे में जानकारी दी है। अधिकारी ने कहा कि इन संसाधनों से लाभ उठाने के लिए बोली और अन्वेषण प्रस्तावों का अध्ययन किया जा रहा है, जिसका अर्थ है कि निकट भविष्य में अन्वेषण कार्य शुरू किया जा सकता है।

दुनिया का चौथा सबसे बड़ा गैस भंडार

अधिकारियों ने बताया, कहा कि हालांकि कुओं की खुदाई और वास्तव में तेल निकालने के काम में कई साल लग सकते हैं। अधिकारी ने कहा कि इस संबंध में पहल करने और जल्दी से काम पूरा करने से देश की आर्थिक किस्मत बदलने में मदद मिल सकती है। कुछ अनुमान बताते हैं कि यह खोज दुनिया में चौथा सबसे बड़ा तेल और गैस भंडार है।

बदल जाएगी बदहाल पाकिस्तान की किस्मत

समुद्री सीमा में मिले तेल और गैस भंडार का पाकिस्तान अगर दोहन करने में कामयाब हो जाता है, तो इससे इसकी आर्थिक स्थिति बिल्कुल बदल सकती है। दरअसल, पाकिस्तान बीते कुछ सालों से आर्थिक दीवालियेपन का शिकार है। यहां की अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी है और मुल्क में महंगाई कमर तोड़ रही है। पाकिस्तान में आटा, तेज, चीनी जैसे जरूरी खाद्य सामग्रियों की कीमत आसमान छू रही है और पाकिस्तान पूरी तरह कर्ज के जाल में घिर चुका है। यहां का विदेश मुद्रा भंडार भी खत्म होता जा रहा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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