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'एक सेकेंड में गायब हो गया डर...' वर्जीनिया में बोले राहुल गांधी, कहा- 56 इंच का सीना अब इतिहास

Rahul Gandhi US Visit: अमेरिका के वर्जीनिया में राहुल गांधी ने कहा, भाजपा के लोगों को डर फैलाने में सालों लग गए और कुछ सेकंड में सब गायब हो गया। संसद में अब मैं प्रधानमंत्री को सामने से देखता हूं और मैं आपको बता सकता हूं कि 56 इंच का सीना, अब इतिहास की बात है।

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राहुल गांधी।

Photo : Twitter

Rahul Gandhi US Visit: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इन दिनों अमेरिका दौरे पर हैं। सोमवार रात उन्होंने वर्जीनिया के हर्नडन में इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के लोगों को संबोधित किया। इस दौरान राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी और पीएम मोदी पर हमला बोला और लोकसभा चुनाव के बाद के अनुभवों को साझा किया। राहुल गांधी ने कहा, लोकसभाा चुनावों के बाद कुछ बदल गया है। पीएम मोदी की डराने की रणनीति केवल चुनावों तक ही सीमित थी, चुनाव खत्म होते ही वह भी गायब हो गई। उन्होंने कहा, कई लोगों ने मुझसे कहा कि 'अब डर नहीं लगता है, अब डर निकल गया'।

राहुल गांधी ने आगे कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी ने इतना डर फैलाया। छोटे व्यवसायों पर एजेंसियों का दबाव डाला गया। सब कुछ सेकेंड में गायब हो गया, यह मेरे लिए दिलचस्प है। उन्होंने कहा, भाजपा के लोगों को यह डर फैलाने में सालों लग गए और कुछ सेकंड में सब गायब हो गया। राहुल गांधी ने आगे कहा, संसद में मैं प्रधानमंत्री को सामने से देखता हूं और मैं आपको बता सकता हूं कि 56 इंच का सीना, भगवान से सीधा संबंध, यह सब अब खत्म हो गया है, यह सब अब इतिहास है।

देश सबका है...यह बात BJP नहीं समझती

इस दौरान राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, बीजेपी यह नहीं समझती कि यह देश सबका है और भारत एक संघ है। संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा कि भारत जो राज्यों का संघ है, जिसमें विभिन्न इतिहास, परंपराएं, संगीत और नृत्य शामिल हैं। लेकिन बीजेपी के लोग कहते हैं कि यह संघ नहीं है, यह कुछ और ही है। उन्होंने कहा, आरएसएस का कहना है कि कुछ राज्य दूसरे राज्यों से कमतर हैं। कुछ भाषाएं दूसरी भाषाओं से कमतर हैं, कुछ धर्म दूसरे धर्मों से कमतर हैं और कुछ समुदाय दूसरे समुदायों से कमतर हैं। उन्होंने कहा, हर राज्य का अपना इतिहास, परंपरा है। आरएसएस की विचारधारा में तमिल, मराठी, बंगाली, मणिपुरी है, ये कमतर भाषाएं हैं। इसी बात को लेकर लड़ाई है, ये लोग (आरएसएस) भारत को नहीं समझते।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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