Rafale Fighter Jets: फ्रांस ने अपनी अगली पीढ़ी की हवा से हवा में मार करने वाली माइका एनजी (MICA NG) मिसाइल का राफेल लड़ाकू विमान से दूसरा सफल परीक्षण किया। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि दुश्मन के रडार से बचने वाले 'स्टील्थ' लड़ाकू विमानों, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को तबाह करने के लिए शिकारी मिसाइल बनाई गई है, जिसका पहली बार सुपरसोनिक फ्लाइट कॉन्फ़िगरेशन में परीक्षण किया गया।
यह परीक्षण जून 2025 में हुए पहले परीक्षण के बाद माइका एनजी मिसाइल को राफेल विमानों के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
शिकार में माहिर है शिकारी
मिसाइल निर्माता कंपनी एमबीडीए के मुताबिक, यह टेस्ट फ्रांस के रक्षा खरीद संगठन (DGA) के भूमध्यसागरीय मिसाइल परीक्षण केंद्र पर आयोजित किया गया। इस टेस्ट का मकसद मिसाइल के 'इंफ्रारेड सीकर' को परखना था, जो दुश्मन के विमान से निकलने वाली 'हीट सिग्नेचर' यानी गर्मी को ट्रैक कर उसका पीछा करता है।
सुपरसोनिक रफ्तार की वजह से मिसाइल के आसपास को तापमान काफी ज्यादा बढ़ जाता है, जिसकी वजह से दुश्मन को तलाशना काफी मुश्किल होता है। इसके बावजूद, टेस्ट ने यह साबित कर दिया कि शिकारी मिसाइल अत्यधिक तापमान और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी लक्ष्य को नेस्तनाबूत करने की क्षमता रखती है।
भारत के लिए क्यों है खास?
यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ जब भारत अपने राफेल बेड़े में बड़े विस्तार की तैयारी को लेकर आगे बढ़ चुका है। भारत सरकार ने एक जून, 2026 को ही फ्रांस को 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए एक आधिकारिक 'लेटर ऑफ रिक्वेस्ट' भेजा है। सरकारी स्तर पर होने वाली यह मेगा रक्षा डील करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की है।
भारत में बनेंगे राफेल विमान
इस डील के तहत पहली बार फ्रांस से बाहर राफेल विमान बनेंगे। बताया जा रहा है कि कुल 114 विमानों में से 94 राफेल विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी कर 'मेक इन इंडिया' के तहत राफेल लड़ाकू विमानों को बनाएगी।
