स्वीडन में पवित्र कुरान को जलाने की घटना इस बार यह स्वीडन की संसद के सामने हुई है, पवित्र पुस्तक को जलाने वाले ईद उल अजहा के मौके पर पहले भी ऐसा कर चुके हैं। बताते हैं कि घटना में शामिल दोनों वही थे जिन्होंने जून के महीने में स्टॉकहोम की मुख्य मस्जिद के बाहर इसी तरह की हरकत को अंजाम दिया था।
सोमवार को स्टॉकहोम में स्वीडन की संसद के बाहर दो प्रदर्शनकारियों ने कुरान के पन्ने फाड़े और उन्हें जला दिया, हाल के हफ्तों में यह तीसरा प्रदर्शन है।
घटना पर दुनिया भर के मुस्लिम देशों ने नाराजगी जाहिर की
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सोमवार को सलवान मोमिका और सलवान नजेम नाम के शख्स ने संसद के बाहर पवित्र कुरान का अपमान किया। इसके बाद उन्होंने किताब के कुछ पन्ने जला दिए गौर हो कि मोमिका एक ईसाई इराकी शरणार्थी है, इस घटना पर दुनिया भर के मुस्लिम देशों ने नाराजगी जाहिर की थी साथ ही कई मुल्कों में इस घटना के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन भी किए थे।
मुस्लिम पवित्र पुस्तक को जलाने की योजना
हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस ने सोमवार को संसद के बाहर एक विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी, जिसमें उत्तेजित प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर मुस्लिम पवित्र पुस्तक को जलाने की योजना बनाई।
कुरान के अपमान पर स्वीडन और डेनमार्क की प्रतिक्रिया की आलोचना
वहीं इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने सोमवार को बार-बार कुरान के अपमान पर स्वीडन और डेनमार्क की प्रतिक्रिया की आलोचना की।
उधर स्वीडन के प्रधानमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा था कि इस्लाम की पवित्र पुस्तक का अपमान करके प्रदर्शनकारी स्वीडन को आतंकवाद का बड़ा टार्गेट बना रहे हैं।
