दुनिया

'यहां से तुरंत निकलो...' ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही कतर ने हमास को थमाया नोटिस, दिया देश छोड़ने का अल्टीमेटम

Israel Hamas War: हमास के कार्यकर्ताओं को कतर से कब निर्वासित किया जाएगा और वे कहां जाएंगे - यह स्पष्ट नहीं है। हालांकि एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया कि समूह को देश छोड़ने के लिए अधिक समय नहीं दिया गया है।

Image

अमेरिका के आग्रह पर कतर ने हमास को बाहर निकाला।

Photo : AP

Israel Hamas War: इजराइल से बुरी तरह पिटने के बाद हमास को एक और झटका लगा है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के अनुरोध पर कतर हमास को अपने देश से बाहर निकालने पर सहमति हो गया है। दरअसल, इजरायल-हमास युद्ध को रोकने की कोशिशों के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने कतरी समकक्षों को लगभग दो सप्ताह पहले सूचित किया कि उन्हें अपनी राजधानी में हमास को शरण देना बंद करना चाहिए। इस पर कतर ने सहमति व्यक्त की और लगभग एक सप्ताह पहले हमास को नोटिस थमा दिया।

सीएनएन के अनुसार अमेरिका और कतर के सूत्रों ने बताया कि फिलिस्तीनी ग्रुप को इजरायल-हमास युद्ध में सीजफायर और बंधकों की रिहाई के समझौते के लिए मनाने की कई नाकाम कोशिशों के बाद यह कदम उठाया गया। एक वरिष्ठ प्रशासन अधिकारी ने बताया, "हमास एक आतंकवादी समूह है जिसने अमेरिकियों को मारा है और कई को बंधक बनाकर रखा है। बंधकों को रिहा करने के प्रस्तावों को बार-बार खारिज करने के बाद, इसके नेताओं का अब किसी भी अमेरिकी साझेदार की राजधानियों में स्वागत नहीं किया जाना चाहिए।

हमास ने खबरों को बताया निराधारा

हालांकि हमास ने कतर की ओर से फिलिस्तीनी ग्रुप के अधिकारियों को दोहा से निष्कासित करने पर सहमति जताने की खबरों को 'निराधार" और 'दबाव की रणनीति' बताया। हमास ने कहा कि इस तरह के दावे पहले भी मीडिया में बिना किसी सबूत के किए जाते रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक हमास के अधिकारी ने शनिवार को कहा, 'जरायली मीडिया में दावा किया गया कि कतर ने अमेरिका के अनुरोध के बाद दोहा से हमास को बाहर निकालने पर सहमति जताई है। हालांकि इसका कोई आधार नहीं है और यह केवल दबाव बनाने की रणनीति है। इसे बिना किसी सबूत के दोहराया गया है।

जल्द ही दोहा छोड़ेंगे हमास के लीडर्स

हाल ही में अमेरिकी-इजरायली बंधक हर्श गोल्डबर्ग-पोलिन की मौत और हमास द्वारा एक और युद्धविराम प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद कतर फिलिस्तीनी ग्रुप को बाहर निकालने पर राजी हुआ। पिछले एक साल से इजरायल-हमास युद्ध में सीजफायर करवाने के लिए कतर एक प्रमुख खिलाड़ी रहा है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि फिलिस्तीनी ग्रुप के सीनियर मेंबर्स दोहा में रहते हैं। इसी वजह से कतर की राजधानी में प्रमुख वार्ताएं हुई हैं। हमास के कार्यकर्ताओं को कतर से कब निर्वासित किया जाएगा और वे कहां जाएंगे - यह स्पष्ट नहीं है। हालांकि एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया कि समूह को देश छोड़ने के लिए अधिक समय नहीं दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भी गर्मियों में कतर से कहा कि वह हमास को चेतावनी दे कि अगर ग्रुप गाजा में युद्ध रोकने के लिए सहमत नहीं होता है, तो उन्हें दोहा से बाहर निकाला जा सकता है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article