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पाक सेना प्रमुख की भड़काऊ बयानबाजी; फिर अलापा टू नेशन थ्योरी का राग

India vs Pakistan: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी तेज हो चुकी है। पड़ोसी मुल्क ने बार बार ये बताया कि वो अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आता है। इसी बीच पाक आर्मी चीफ सैयद असीम मुनीर ने फिर भड़काऊ बयानबाजी की है। उन्होंने क्या कहा, इस रिपोर्ट में बताते हैं।

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पाकिस्तानी आर्मी चीफ सैयद असीम मुनीर ।

Provocative Statements by Pak Army Chief: पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष (सीओएएस) जनरल सैयद असीम मुनीर ने शनिवार को एक बार फिर द्वि-राष्ट्र सिद्धांत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इसके पीछे मूल विचार यह है कि मुस्लिम और हिंदू दो अलग-अलग राष्ट्र हैं।

पाकिस्तानी आर्मी चीफ ने की भड़काऊ बयानबाजी

मुनीर ने ऐबटाबाद के काकुल में पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी (पीएमए) में पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए कहा, 'द्वि-राष्ट्र सिद्धांत इस मौलिक विश्वास पर आधारित है कि मुसलमान और हिंदू एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग राष्ट्र हैं। मुसलमान जीवन के सभी पहलुओं - धर्म, रीति-रिवाज, परंपरा, सोच और आकांक्षाओं - में हिंदुओं से अलग हैं।'

पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान का अस्तित्व 'अद्वितीय संघर्ष और कुर्बानी' का नतीजा है। उन्होंने कहा कि इसकी सुरक्षा करना देश के सशस्त्र बलों का कर्तव्य है।

पहलगाम हमले के बाद भारत के साथ बढ़ते तनाव का जिक्र

मुनीर ने पहलगाम हमले के बाद भारत के साथ बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए कहा, 'हमारे पूर्वजों ने पाकिस्तान के निर्माण के लिए बलिदान दिया। हम जानते हैं कि इसकी रक्षा कैसे करनी है।'

पहलगाम आतंकी हमले के बारे में क्या बोले पाक पीएम?

इस सभा को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहलगाम आतंकी हमले की किसी भी 'तटस्थ, पारदर्शी और विश्वसनीय' जांच में भाग लेने के लिए तैयार है।

आतंकियों ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल - पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में लोगों (ज्यादातर पर्यटक) पर अंधाधुंध गोलियां चला दी थीं। हमले में कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है।

हिंदुओं के बारे में पाक आर्मी चीफ ने कही थी ये बात

यह पहली बार नहीं है जब मुनीर ने द्वि-राष्ट्र सिद्धांत का जिक्र किया हो। पहलगाम में जघन्य हमले से कुछ दिन पहले ही पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने एक बेहद भड़काऊ भाषण दिया था। 16 अप्रैल को इस्लामाबाद में मुनीर ने पीएम शरीफ की मौजूदगी में ही प्रवासी पाकिस्तानियों के सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा था कि वे यह न भूलें कि वे एक 'उच्च विचारधारा और संस्कृति' से जुड़े हैं।

पाक सेना प्रमुख ने कहा, 'आपको अपने बच्चों को पाकिस्तान की कहानी जरूर बतानी चाहिए। हमारे पूर्वजों का मानना था कि हम जीवन के हर पहलू में हिंदुओं से अलग हैं। हमारे धर्म, हमारे रीति-रिवाज, परंपराएं, विचार और महत्वाकांक्षाएं अलग हैं। इसी आधार पर दो-राष्ट्र सिद्धांत की नींव रखी गई थी।'

भारत ने तत्काल ही पाक सेना प्रमुख पर निशाना साधा था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 17 अप्रैल को नई दिल्ली में एक नियमित मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'देखिए, कोई विदेशी चीज उनके गले की नस कैसे बन सकती है? यह भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है। पाकिस्तान के साथ इसका एकमात्र संबंध उस देश द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए क्षेत्रों को खाली करना है।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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