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PoK में शहबाज सरकार के खिलाफ क्यों सड़कों पर हो रहा विरोध प्रदर्शन? पुलिसकर्मी समेत कई लोग घायल, एक की मौत

विरोध दो साल पहले इस क्षेत्र में आटे और बिजली की नियमित और सब्सिडी वाली सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए शुरू हुआ था, लेकिन अब इसमें कश्मीरी अमीरों को मिलने वाले विशेषाधिकारों में कटौती, आरक्षित विधानसभा सीटों का खत्म होना और मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं जैसी अतिरिक्त मांगें भी शामिल हो गई हैं।

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PoK में शहबाज सरकार के खिलाफ सड़कों पर लोग। (Photo-ANI)

PoK Protests: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक पुलिसकर्मी समेत 12 अन्य घायल हो गए। यह घटना संचार सेवाओं के बंद होने के बीच इलाके में हड़ताल के दौरान हुई। जम्मू कश्मीर ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) द्वारा अपनी मांगों को पूरा न किए जाने के विरोध में बुलाई गई इस हड़ताल के दौरान विरोधी समूहों ने एक साथ प्रदर्शन किए। दोनों पक्षों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप एक-दूसरे पर लगाया।

डॉन अखबार के अनुसार, रविवार दोपहर से PoK में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद हैं और बताया गया कि यह प्रतिबंध बुधवार तक जारी रह सकता है। सोमवार दोपहर नीलम ब्रिज के पास हुई झड़प में ये लोग मारे गए।

आपस में ही चली गोली

मुस्लिम कॉन्फ्रेंस के नेता राजा साकिब मजीद की अगुवाई वाली 'शांति रैली' और वहां जमा JKJAAC के प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। लोगों का कहना है कि शांति रैली के लोगों ने बिना किसी उकसावे के JKJAAC के प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी। रिपोर्ट में कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान गोली लगने से एक बर्तन की दुकान के मालिक की इलाज के दौरान मौत हो गई। एक अन्य दुकानदार छर्रे लगने से घायल हो गया। उनके द्वारा बताया गया कि प्रदर्शनकारियों ने मजीद के काफिले को रास्ता देने के लिए जगह बनाई, लेकिन उसके सुरक्षाकर्मियों ने गाड़ियों से निकलकर उन पर हमला कर दिया। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, शांति रैली को पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने सुरक्षा दी थी। पुलिस ने JAC प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे और उन पर गोली भी चलाई।

आखिर क्यों हो रहा विरोध?

यह विरोध दो साल पहले इस क्षेत्र में आटे और बिजली की नियमित और सब्सिडी वाली सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए शुरू हुआ था, लेकिन अब इसमें कश्मीरी अमीरों को मिलने वाले विशेषाधिकारों में कटौती, आरक्षित विधानसभा सीटों का खत्म होना और मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं जैसी अतिरिक्त मांगें भी शामिल हो गई हैं।

JKJAAC का आरोप है कि इस बार यह नया विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि सरकार दो साल पहले हुए समझौते को पूरी तरह लागू करने में नाकाम रही है। प्रदर्शनकारियों ने 38 सूत्री मांगों का एक चार्टर पेश किया। मुख्य मांगों में शरणार्थियों के लिए 12 आरक्षित सीटों को खत्म करना और अमीरों को मिलने वाले विशेषाधिकारों को वापस लेना शामिल है।

ये मांगें भी उठाई गईं

अन्य मांगों में कई सड़क परियोजनाओं का निर्माण, करों में राहत, आटे और बिजली पर सब्सिडी, शरणार्थियों के लिए नौकरी कोटा खत्म करना, न्यायपालिका में सुधार और कई अन्य स्थानीय मांगें शामिल हैं।

शाम में, सैकड़ों लोग मुजफ्फराबाद के लाल चौक पर जमा हुए, जहां जेएसी नेताओं ने भाषण दिए। पूरे PoK में सभी दुकानें और व्यवसाय बंद रहे और सड़क किनारे के विक्रेता भी नहीं दिखे, जबकि सड़कें भी सुनसान रहीं।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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