PoJK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में लंबे समय से जारी राजनीतिक अशांति और जन-विरोध अब पाकिस्तान की राजधानी तक पहुंच चुका है। रविवार को PoJK में आयोजित विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण के दौरान बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, प्रशासनिक नाकामी और पुलिसिया कार्रवाई देखने को मिली। इस जनाक्रोश का असर अब इस्लामाबाद और रावलपिंडी जैसे मुख्य शहरों में भी साफ दिखाई देने लगा है।
रावलपिंडी प्रेस क्लब के बाहर रविवार शाम बड़ी संख्या में छात्र और स्थानीय लोग एकत्र हुए, जिनमें PoJK के निवासी भी शामिल थे। चुनावी प्रक्रिया में धांधली और सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे इन छात्रों पर पाकिस्तानी पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठियां बरसाईं और कई छात्र नेताओं व प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: पाकिस्तान में शांति रैली पर बड़ा आतंकी हमला, खैबर पख्तूनख्वा में विस्फोट से 14 की मौत, 18 घायल; मची अफरा-तफरी
पूरी तरह चरमराई चुनावी व्यवस्था
यह विरोध प्रदर्शन PoJK में हो रहे दूसरे चरण के चुनावों के दौरान शुरू हुआ, जिसमें मुजफ्फराबाद मंडल की 9 और शरणार्थी निर्वाचन क्षेत्रों की 12 सीटों पर मतदान होना था। हालांकि, जनता के भारी विरोध और जगह-जगह मुख्य सड़कों के जाम होने के कारण चुनावी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। कई इलाकों, जैसे एलए-27 कोटली और एलए-28 मुजफ्फराबाद में चुनाव कर्मी और मतदान सामग्री पोलिंग स्टेशनों तक पहुंच ही नहीं सके, जिसके चलते अधिकारियों को इन जगहों पर मतदान स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
कई क्षेत्रों में लोगों ने चुनाव का किया बहिष्कार
विपक्षी दलों और स्थानीय नागरिक संगठनों का कहना है कि जहां चुनाव सामग्री ही न पहुंच सके, वहां चुनाव की निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा होता है। इस वजह से कई क्षेत्रों में लोगों ने चुनाव का बहिष्कार किया और मतदान केंद्रों से दूरी बनाए रखी। राजधानी इस्लामाबाद के प्रसिद्ध डी-चौक पर भी प्रदर्शनकारियों ने बड़ा धरना दिया है और मुजफ्फराबाद की ओर 'लॉन्ग मार्च' निकालने की घोषणा की है।
वहीं, रावलकोट से सुरक्षा बलों द्वारा की गई छिटपुट गोलीबारी की खबरें भी सामने आ रही हैं। इसके अलावा, ड्रेक ईदगाह में पिछले 50 दिनों से जारी धरना प्रदर्शन में महिलाएं और बच्चे भी लगातार डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी राजनीतिक सुधारों और नागरिक अधिकारों से जुड़ी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन थमेगा नहीं।
