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गुयाना में CARICOM समिट में हिस्सा लेंगे पीएम मोदी, जानिए क्यों खास है ये सम्मेलन

2019 में न्यूयॉर्क मे पहला शिखर सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र संघ की वार्षिक महासभा के दौरान पीएम मोदी की पहल पर हुआ था। कैरिकॉम–भारत शिखर सम्मेलन भारत सरकार की ग्लोबल साउथ देशों की आवाज को मंच देने की प्रतिबद्धता का परिणाम है।

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पीएम मोदी का गुयाना दौरा

Photo : ANI

PM Modi in Guyana: ब्राजील की यात्रा समाप्त करने के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिन की गुयाना यात्रा पर हैं। ये यात्रा अति महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां भारत-कैरिकॉम देशों का शिखर सम्मेलन है। कैरिकॉम यानी कैरिबियन सागर के द्वीपों के देशों का समूह कैरेबियन कम्युनिटी एंड कॉमन मार्केट (कैरिबियन समुदाय और साझा बाजार ) के साथ भारत का ये दूसरा शिखर सम्मेलन होगा। गुयाना की राजधानी जॉर्ज टाउन में हो रहे दूसरे शिखर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, गुयाना के राष्ट्रपति मोहम्मद इरफान अली और कैरिकॉम के महासचिव अपने विचार रखेंगे।

पीएम मोदी की पहली पर हुआ पहला सम्मेलन

2019 में न्यूयॉर्क मे पहला शिखर सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र संघ की वार्षिक महासभा के दौरान पीएम मोदी की पहल पर हुआ था। कैरिकॉम–भारत शिखर सम्मेलन भारत सरकार की ग्लोबल साउथ देशों की आवाज को मंच देने की प्रतिबद्धता का परिणाम है। साझा विषय मुख्य रूप से आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय सुरक्षा अहम हैं। 6 नवंबर को शिखर सम्मेलन से पहले जॉर्ज टाउन में भारत-कैरिकॉम संयुक्त आयोग की बैठकें हुई जिसमें पिछले समझौतों की समीक्षा की गई। इनमें आर्थिक, कमर्शियल, कृषि, स्वास्थ्य, फार्मास्युटिकल्स, ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, नवाचार, मानव संसाधन, संस्कृति और क्षमता निर्माण संबंधी समझौते शामिल थे।

पिछ्ले साल जी-20 की अध्यक्षता के समय से ही भारत ने ग्लोबल साउथ देशों को साथ लेकर चलने का वातावरण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाया था। नई दिल्ली में सितंबर 2023 में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले जनवरी 2023 में 120 देशों का ग्लोबल साउथ मंच बनाया गया था। कैरेबियाई देशों के साथ संबंध मजबूत करने के लिए भारत जितना प्रतिबद्ध है ठीक उसी तरह कैरेबियाई देश भी भारत के साथ अपने रिश्ते हर क्षेत्र में मजबूत करना चाहते हैं।

बैठक के लिए विस्तृत और व्यापक एजेंडा तैयार

भारत के विदेश मंत्रालय ने कैरीकॉम के साथ बैठक के लिए विस्तृत और व्यापक एजेंडा तैयार किया है। दूसरे शिखर सम्मेलन में बहुत से महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। कैरिकॉम 21 देशों का समूह है जिसमें 15 स्थायी सदस्य हैं इनमें से गुयाना, सूरीनाम , त्रिनिदाद जैसे देशों में भारतीय मूल के लोगों की आबादी अच्छी खासी है। बाकी 6 सहायक सदस्य और सात पर्यवेक्षक हैं। कैरिकॉम की स्थापना जुलाई 1973 में की गई थी जिसका उद्देश्य था कैरिबियन देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक साझा बाजार का निर्माण।

इन देशों की आपस में मुक्त व्यापार संधि है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी विदेश नीति के तहत दक्षिण वैश्विक देशों को एक बैनर तले लाने को बहुत महत्व दिया और इस दिशा मे काम किया। अप्रत्यक्ष तरीके से पीएम मोदी कह भी चुके हैं कि यदि दूसरे विश्व युद्ध के समय बनाए गए अंतरराष्ट्रीय संगठन बदलते समय के साथ नहीं बदलेंगे तो उनकी प्रासंगिकता खत्म हो सकती है। विकसित देश गरीब और विकासशील देशों की चिंताओं और आकांक्षाओं को नहीं समझेंगे तो समानांतर संगठन बनेंगे जो अपने हितों की रक्षा करेंगे। भारत और कैरेबियाई देश दोनों ही दूसरे शिखर सम्मेलन में होने वाले समझौतों की प्रतीक्षा में है जिससे काफी उम्मीदें भी हैं।

Sunita  Arya Jha
सुनीता आर्या झाauthor

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