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श्रीलंका में पीएम मोदी पहुंचे आईपीकेएफ स्मारक, शहीद भारतीय सैनिकों को दी श्रद्धांजलि; देखें तस्वीरें

PM Modi Visited IPKF Memorial in Sri Lanka: श्रीलंका में पीएम मोदी ने आईपीकेएफ स्मारक जाकर शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमने भारतीय शांति सेना के उन बहादुर सैनिकों को याद किया हैं जिन्होंने श्रीलंका की शांति, एकता और क्षेत्रीय अखंडता की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी।

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पीएम मोदी ने कोलंबो में IPKF स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलंबो में भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) स्मारक जाकर शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। यह स्मारक लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के खिलाफ अभियान में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया था। आईपीकेएफ स्मारक पर 1987 से 1990 के बीच शहीद हुए 1200 सैनिकों के नाम काले संगमरमर पर अंकित हैं।

पीएम मोदी ने कोलंबो में IPKF स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की

भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) 1987 और 1990 के बीच श्रीलंका में शांति अभियान चलाने वाली भारतीय सैन्य टुकड़ी थी। इसका गठन 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के तहत किया गया था जिसका उद्देश्य श्रीलंकाई तमिल आतंकवादी समूहों और श्रीलंकाई सेना के बीच गृह युद्ध को समाप्त करना था। आईपीकेएफ का मुख्य कार्य विभिन्न उग्रवादी समूहों को निरस्त्र करना था।

पीएम मोदी ने कहा कि 'कोलंबो में IPKF स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। हमने भारतीय शांति सेना के उन बहादुर सैनिकों को याद किया हैं जिन्होंने श्रीलंका की शांति, एकता और क्षेत्रीय अखंडता की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी। उनका अटूट साहस और प्रतिबद्धता हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।'

पीएम मोदी ने श्रीलंका में तमिल समुदाय के नेताओं से मुलाकात की

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका में शनिवार को तमिल समुदाय के नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा के दौरान शुरू की गई कई परियोजनाएं और पहल समुदाय की प्रगति में योगदान देंगी।

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, 'श्रीलंका के तमिल समुदाय के नेताओं से मिलना हमेशा खुशी की बात होती है। सम्मानित तमिल नेताओं थिरु आर. संपंथन और थिरु मावई सेनाथिराजा के निधन पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं, जिन्हें मैं व्यक्तिगत रूप से जानता था। संयुक्त श्रीलंका में तमिल समुदाय के लिए समानता, सम्मान और न्याय के जीवन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। मेरी यात्रा के दौरान शुरू की गई कई परियोजनाएं और पहल उनकी सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रगति में योगदान देंगी।'

यह 2014 के बाद से प्रधानमंत्री मोदी की चौथी श्रीलंका यात्रा है। जबकि राष्ट्रपति दिसानायके के पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनका पहला दौरा है। पिछले साल दिसंबर में अपनी पहली आधिकारिक भारत दौरे के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति ने उन्हें इस यात्रा का निमंत्रण दिया था। श्रीलंका पिछले दिसंबर में दिसानायके की भारत की राजकीय यात्रा को नई दिल्ली के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों में एक 'महत्वपूर्ण क्षण' मानता है। प्रधानमंत्री मोदी अब पहले नेता हैं जिनकी मेजबानी राष्ट्रपति दिसानायके ने की।

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रीलंका के सर्वोच्च सम्मान 'मित्र विभूषण' से नवाजा गया। राष्ट्रपति दिसानायके ने उन्हें यह सम्मान दिया। यह किसी विदेशी राष्ट्र की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया 22वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मान है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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