प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को अपनी दो देशों की यात्रा के पहले चरण में पोलैंड पहुंचे। यहां उन्होंने पोलैंड की राजधानी में वलीवाडे-कोल्हापुर शिविर की स्मृति में स्थापित पट्टिका पर श्रद्धांजलि अर्पित की। पोलैंड के बाद वे यूक्रेन की राजधानी कीव भी जाएंगे और यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ विचार साझा करेंगे।
वलीवाडे-कोल्हापुर स्मारक पट्टिका पर श्रद्धांजलि अर्पित की
इससे पहले दिन में दो दिवसीय दौरे पर यहां पहुंचे मोदी ने मोंटे कैसीनो युद्ध स्मारक के पास स्थापित वलीवाडे-कोल्हापुर शिविर की स्मारक पट्टिका पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसका उद्घाटन नवंबर 2017 में किया गया था। महाराष्ट्र के कोल्हापुर शहर के निकट वलीवाडे गांव वह स्थान है जहां 5,000 से अधिक पोलिश लोग रहे, एकजुट हुए और अपनी मातृभूमि लौटने से पहले कई वर्षों तक कार्यरत रहे। उनमें से अधिकांश लोग द्वितीय विश्व युद्ध के भीषण संघर्ष के दौरान पोलिश शिविरों से निकासी के बाद भूमि या समुद्री मार्ग से वहां पहुंचे थे।
पोलिश-भारतीय स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की
इसके अलावा पीएम मोदी ने पोलैंड की राजधानी में ‘गुड महाराजा स्क्वायर’ पर एक पोलिश-भारतीय स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। पोलैंड की राजधानी में जामनगर के दिवंगत महाराजा की स्मृति में यह स्मारक बनाया गया है। इसके साथ ही एक संक्षिप्त कार्यक्रम के दौरान नवानगर के जाम साहब दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा की स्मृति में बने स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया।
क्या बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा- “मानवता और करुणा एक न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण विश्व की महत्वपूर्ण नींव है। वारसॉ में नवानगर के जाम साहब स्मारक में जाम साहब दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा के मानवीय योगदान पर प्रकाश डाला गया है, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के कारण बेघर हुए पोलिश बच्चों को आश्रय के साथ-साथ देखभाल भी सुनिश्चित की थी। जाम साहब को पोलैंड में डोबरी महाराजा के नाम से याद किया जाता है।”
यूक्रेन भी जाएंगे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा पिछले 45 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पोलैंड यात्रा है। पोलैंड में अपने प्रवास के दौरान मोदी राष्ट्रपति आंद्रेज सेबेस्टियन डूडा से मिलेंगे और प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। वारसॉ से मोदी कीव जाएंगे, जो 1991 में देश के स्वतंत्र होने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यूक्रेन की पहली यात्रा होगी।
