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'पाकिस्तान के 10 प्रधानमंत्री एक तरफ और PM Modi एक तरफ...', PAK पत्रकार ने पढ़े मोदी की तारीफ में कसीदे

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 16, 2023, 10:30 PM IST

पाकिस्तानी पत्रकार रऊफ क्लासरा ने अपने वीडियो ब्लॉग में कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपहार में मिले सामान को नीलाम किया, जिसका सकारात्मक असर हुआ। जबकि, पाकिस्तानी नेता तोहफों को अपने साथ लेकर चले गए।

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पाकिस्तानी पत्रकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की

Photo : PTI

Pak journalist praised PM Modi: पाकिस्तान की राजनीति में इन दिनों भूचाल आया हुआ है। जनता सड़क पर उतरी हुई है और जबरदस्त संग्राम हो रहा है। पूरा मामला तोशाखाना विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसमें इमरान खान दोषी ठहराए गए हैं। पाकिस्तानी अदालत ने इमरान खान के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है, जिसको लेकर देश ही नहीं दुनिया भर में पाकिस्तान की फजीहत हो रही है।

इस बीच पाकिस्तान के एक वरिष्ठ पत्रकार ने सरकार को आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने पाकिस्तान के इतिहास के दस प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों की तुलना भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की है। अपने वीडियो ब्लॉग में वरिष्ठ पत्रकार रऊफ क्लासरा ने कहा है कि पाकिस्तान के 10 प्रधानमंत्री और चार राष्ट्रपति एक तरफ और पीएम मोदी एक तरफ हैं।

पीएम मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री

पाकिस्तानी पत्रकार ने कहा, प्रधानमंत्री दुनिया के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में से एक हैं। उन्होंने कहा, पाकिस्तान में 10 प्रधानमंत्री और चार राष्ट्रपति हुए हैं, लेकिन परफॉर्मेंस के मामले में कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगे नहीं टिकटा है। उन्होंने आगे कहा, पाकिस्तान के इतिहास में पिछले 20 सालों में कोई ऐसा नेता नहीं हुआ है, जिसने तोहफे में मिले उपहारों की लूट न की हो।

करोड़ों के उपहार देखकर पाक नेताओं की आंखें चौंधियां गई

पाक पत्रकार ने कहा, तोहफे में मिले हीरे जवाहरात देखकर पाक नेताओं की आंखे चौधियां गई थीं। एक तरफ पीएम मोदी द्वारा उपहारों की नीलामी से भारत में, खासकर शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। दूसरी ओर, पाक नेताओं ने अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए तोशखाना उपहारों का उपयोग कैसे किया। उन्होंने कहा, पाकिस्तान को कोई एक ऐसा प्रधानमंत्री नहीं है, जो कह सके कि वह उपहारों का प्रयोग बच्चों की शिक्षा के लिए किया है।

पाक प्रधानमंत्रियों को जोर मिला अपने साथ ले गए

रऊफ क्लासरा ने दावा किया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्रियों को जो उपहार में मिला, वह अपने साथ ले गए। चाहें नवाज शरीफ हों या इमरान खान, हर कोई अपने साथ उपहारों को लेकर गया। उन्होंने दावा किया कि परवेज मुशर्रफ और आरिफ अल्वी को उपहार में गन मिली थी।

क्या है तोशाखाना विवाद

दरअसल, पाकिस्तान में सरकारी संग्रहस्थान को तोशाखाना कहा जाता है। कानून के मुताबिक, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति को विदेशों से मिले उपहारों को इस तोशाखाना में जमा किया जाता है, अगर प्रधानमंत्री उसे अपने पास रखना चाहता है, तो उसे उसका मूल्य चुकाना होता है। इमरान खान पर आरोप है कि उन्हें विदेश से करीब साढ़े 14 करोड़ रुपये के विदेशी उपहार मिले थे, जिसे इमरान खान ने काफी कम कीमत पर खरीदा था।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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