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आखिरकार मजबूर हुआ पाकिस्तान! भारत में फंसे पाकिस्तानी नागरिकों की वाघा बॉर्डर के रास्ते से होगी वापसी

India vs Pakistan: भारत में फंसे अपने नागरिकों को पाकिस्तान वाघा सीमा के रास्ते वापस आने की अनुमति देगा । पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देते हुए इस बात को स्वीकार किया कि बच्चों सहित पाकिस्तानी नागरिकों के भारत में अटारी सीमा पर फंसे होने की रिपोर्ट हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

Photo : ANI

भारत के साथ तनाव के बीच एक बार फिर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान घुटनों पर आ गया है। एक दिन पहले ही उसने वाघा बॉर्डर को बंद कर दिया था, जिसके बाद अब पाकिस्तान ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह पहलगाम में आतंकवादी हमले के मद्दनेजर पाकिस्तानी नागरिकों का वीजा रद्द करने के भारत के फैसले के कारण वहां फंसे अपने नागरिकों के लिए वाघा सीमा के इस्तेमाल की अनुमति देना जारी रखेगा ताकि वे अपने देश लौट सकें।

एक दिन के भीतर ही घुटने पर आया पाकिस्तान!

भारत में अमृतसर और पाकिस्तान में लाहौर के पास स्थित अटारी-वाघा सीमा 30 अप्रैल तक खुली थी। इसे बृहस्पतिवार को बंद कर दिया गया। भारत सरकार द्वारा तय की गई समयसीमा समाप्त हो जाने के बाद बृहस्पतिवार को करीब 70 पाकिस्तानी नागरिक अटारी सीमा पर कथित रूप से फंसे रह गए। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देते हुए इस बात को स्वीकार किया कि बच्चों सहित पाकिस्तानी नागरिकों के भारत में अटारी सीमा पर फंसे होने की रिपोर्ट हैं।

भारत के इस फैसले के बाद मिमियाने लगा पाकिस्तान

मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'हमें मीडिया में आई उन खबरों की जानकारी है जिनमें कहा गया है कि कुछ पाकिस्तानी नागरिक अटारी में फंसे हुए हैं। अगर भारतीय अधिकारी हमारे नागरिकों को अपनी सीमा पार करने की अनुमति देते हैं तो हम उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।' प्रवक्ता ने कहा कि लौटने के इच्छुक पाकिस्तानी नागरिकों के लिए भविष्य में भी वाघा सीमा खुली रहेगी।

पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करने के भारत के फैसले की आलोचना करते हुए पड़ोसी मुल्क का विदेश मंत्रालय मिमियाने लगा। मंत्रालय ने चिकित्सकीय उपचार में बाधा पैदा होने एवं लोगों के अपने परिवारों से जुदा होने का हवाला देते हुए कहा, 'पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करने का भारत का फैसला गंभीर मानवीय चुनौतियां पैदा कर रहा है।'

पाकिस्तानी नागरिकों को ‘भारत छोड़ने’ का नोटिस

पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों द्वारा 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हमला किए जाने के बाद भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों को ‘भारत छोड़ने’ का नोटिस जारी किया था। इसके तहत विभिन्न वीजा श्रेणियों के लिए भारत छोड़ने की अलग-अलग अंतिम तिथियां निर्धारित की गई थीं। दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) वीजा धारकों के लिए यह समयसीमा 26 अप्रैल थी और मेडिकल वीजा धारकों के लिए यह 29 अप्रैल थी। अन्य 12 श्रेणियों के वीजा के लिए अंतिम तिथि 27 अप्रैल थी।

समयसीमा खत्म होने के बाद कोई भी भारत या पाकिस्तान की ओर से एक-दूसरे के देश में प्रवेश नहीं कर सका। भारत के इस कदम के बाद इस्लामाबाद ने भी वाघा सीमा चौकी को बंद कर दिया था और दक्षेस वीजा छूट योजना (एसवीईएस) के तहत भारतीयों को दिए गए वीजा रद्द कर दिए थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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