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अमेरिका के फिर करीब आ रहा है पाकिस्तान ! क्या भारत के लिए बनेगा परेशानी का सबब

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  • Updated Oct 6, 2022, 08:52 PM IST

USA-Pakistan Relation: ट्रंप प्रशासन ने 2018 में पाकिस्तान के तालिबान और हक्कानी नेटवर्क पर कार्रवाई करने में नाकाम रहने पर, पाक को दी जाने वाली करीब दो अरब डॉलर की वित्तीय सहायता रोक दे थी। लेकिन अब राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पाकिस्तान को पहले से दिए गए एफ-16 लड़ाकू विमान के बेड़े के रखरखाव के लिए 45 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है।

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अमेरिका-पाक क्यों बढ़ रही है नजदीकी

KEY HIGHLIGHTS
  • विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने F-16 पर नई डील पर कहा था कि आप जानते हैं कि उन्हें कहां तैनात किया गया है और उनका इस्तेमाल क्या है।
  • पाकिस्तान में अमेरिका के राजदूत डोनल्ड ब्लोम ने पाक अधिकृत कश्मीर को आजाद कश्मीर कहकर ट्वीट किया है।
  • इमरान खान के कार्यकाल के समय अमेरिका-पाकिस्तान रिश्ते काफी बिगड़ गए थे।

USA-Pakistan Relation: भारतीय विदेश मंत्री एस.जयशंकर का बीते 25 सितंबर का बयान काफी सुर्खियों में आया था। जिसमें उन्होंने अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के साथ F-16 लड़ाकू विमानों के रख-रखाव के लिए की गई डील पर कहा था कि आप जानते हैं कि उन्हें कहां तैनात किया गया है और उनका इस्तेमाल क्या है। जयशंकर का इशारा साफ था कि अमेरिका का यह फैसला भारत के हितों के विपरीत है। विदेश मंत्री के बयान के पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इस डील पर चिंता जता चुके थे।

अभी यह मुद्दा शांत नहीं हुआ था कि पाकिस्तान में अमेरिका के राजदूत डोनल्ड ब्लोम ने कश्मीर को लेकर बड़ा ट्वीट कर दिया है। उन्होंने ट्रीट में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को आजाद कश्मीर लिखा है। जैसा कि अमेरिका पहले कभी नहीं कहते आया है। इन दो घटनाओं से साफ है कि अमेरिका और पाकिस्तान, इमरान खान के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के बीच आई दूरी को कम करना चाहते हैं। जो कि भारत के लिए चिंता का सबब बन सकता है।

डोनॉल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को रोक दी थी सैन्य सहायता

असल में ट्रंप प्रशासन ने 2018 में पाकिस्तान के तालिबान और हक्कानी नेटवर्क पर कार्रवाई करने में नाकाम रहने पर, उसे दी जाने वाली करीब दो अरब डॉलर की वित्तीय सहायता रोक दे थी। लेकिन सितंबर के महीने में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पाकिस्तान को पहले से दिए गए एफ-16 लड़ाकू विमान के बेड़े के रखरखाव के लिए 45 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी थी। अमेरिका का कहना था कि पाकिस्तान को यह वित्तीय मदद इसलिए दे रहे हैं ताकि वह वर्तमान और भविष्य में आतंकवाद रोधी खतरों से निपट सकें।

आतंकवाद रोधी खतरे को कम करने की अमेरिकी दलील, शुरूआत से ही बेमानी नजर आती है। असल में जब भारत ने पुलवामा में आतंकी हमले के बाद एयरस्ट्राइक की थी, तो उसके विरोध में पाकिस्तान ने F-16 विमानों के जरिए भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की थी। और उस वक्त विंग कमांडर अभिनंदन ने मिग-21 से F-16 विमानों को मार गिराया था। जाहिर है अमेरिकी मदद पाकिस्तान वायुसेना को मजबूत करेगी। और वह भारत के लिए चुनौती बनेगी।

पूर्व विदेश सचिव ने अमेरिकी राजदूत के बयान पर जताई आपत्ति

इसी तरह अमेरिका के राजदूत डोनल्ड ब्लोम ने पाक अधिकृत कश्मीर का हाल ही में दौरा किया है। और उसे आजाद कश्मीर कहा है। जिस पर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने आपत्ति जताई है। सिब्बल ने कहा है कि भारत हमेशा से कहता रहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत का क्षेत्र है. हमने इसीलिए चीन पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर का विरोध किया था क्योंकि यह हमारी संप्रभुता का उल्लंघन करता है। अमेरिका इस बात को जानता है। इसके बावजूद वहआजाद जम्मू-कश्मीर कह रहा है। क्या अमेरिकी राजदूत को पूरी जानकारी नहीं दी गई या उन्हें कहा गया है कि अमेरिका अब इसे विवादित क्षेत्र नहीं मानेगा ?

इसके अलावा पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल जनरल कमर जावेद बाजवा अमेरिका पहुंच गए है। जहां उनकी कोशिश एक बार फिर अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्तों को पटरी पर लाने की रहेगी। जिससे अमेरिका से पाकिस्तान को सैन्य सहयोग मिल सके।

रूस से नजदीकी का जवाब दे रहा है अमेरिका

जिस तरह अमेरिका और पाकिस्तान के बीच नजदीकियां बढ़ रही है, उसे देखते हुए यह भी कयास लग रहे हैं कि जिस तरह भारत ने पश्चिमी देशों के दबाव के रूस से युद्ध के समय संबंध बनाए रखे हैं। वह बदली अमेरिकी नीति के रूप में दिख रहा है। हालांकि इन कयासों पर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय में सहायक मंत्री एली रैटनर ने कहा कि इस डील का भारत के रूस के साथ बेहतर रिश्तों से संबंध नहीं है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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