पाकिस्तान दुनियाभर के देशों से कर्ज ले चुका है। IMF और वर्ल्ड बैंक भी पाकिस्तान को कर्ज दे-देकर थक चुके हैं। लेकिन पाकिस्तान और उसके हुक्मरानों को कतई शर्म नहीं आती और वह बार-बार भीख का कटोरा लेकर कभी वर्ल्ड बैंक तो कभी IMF और कभी सऊदी पहुंच जाते हैं। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गर्त में जा चुकी है और गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा यह देश आज भी आतंकवाद का एपिसेंटर बना हुआ है। भारत सहित दुनिया के किसी भी देश में आतंकी घटना का सीधा तार पाकिस्तान से ही जुड़ता है। कंगाल पाकिस्तान सऊदी अरब का 2 बिलियन डॉलर का कर्ज नहीं चुका पा रहा है। अब कंगालिस्तान, सऊदी अरब को एक और तिगड़म में फंसाने की कोशिश कर रहा है। चलिए जानते हैं -
पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और उसकी नकद भुगतान की क्षमता भी लगातार कमजोर होती जा रही है। इसी बीच पाकिस्तान अब अपने बाहरी कर्ज का एक हिस्सा चुकाने के लिए एक अजीब सा रास्ता तलाश रहा है, बल्कि कहें तिगड़म भिड़ाने की कोशिश कर रहा है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ करीब 2 अरब डॉलर के कर्ज को नकद के बजाय सैन्य सौदे में बदलने पर बातचीत कर रहा है। 2 अरब डॉलर के कर्ज के बदले पाकिस्तान ने सऊदी अरब को 'चीनी कबाड़' देने की पेशकश की है। जी हां, पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त रूप से जो जेएफ-17 थंडर नाम का 'कबाड़' बनाया है, जिसे वह लड़ाकू विमान कहता है, अब उसे सऊदी अरब को बेचने की पेशकश की है।
कर्ज चुकाने की बजाय तिगड़म की कोशिश में पाकिस्तान
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने पिछले कई सालों में चीन और सऊदी अरब सहित कई देशों से भारी कर्ज लिया है। इस समय पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार दबाव में हैं और देश अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के बेलआउट कार्यक्रम के तहत चल रहा है। ऐसे में पाकिस्तान की भिखारी सरकार नकद भुगतान के बजाय वैकल्पिक समाधान यानी तिगड़म की तलाश में है। कर्ज को हथियार सौदे में बदलने का विकल्प पाकिस्तान के लिए एक व्यावहारिक रास्ता हो सकता है, लेकिन बड़ी बात ये है कि जिस चीनी कबाड़ को वह बेचना चाहता है, उसका खरीददार कौन है?
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फाइटर जेट के नाम पर सऊदी को और लूटने का प्लान
रॉयटर्स से बातचीत में पाकिस्तान के दो सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित समझौते के तहत सऊदी अरब को जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमान की आपूर्ति की जा सकती है। एक सूत्र के मुताबिक, इस संभावित सौदे की कुल कीमत लगभग 4 अरब डॉलर हो सकती है। इसमें से 2 अरब डॉलर सऊदी अरब के कर्ज के एडजस्ट होंगे, जबकि बाकी रकम हथियारों, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, स्पेयर पार्ट्स और पायलट ट्रेनिंग पर खर्च होगा। हालांकि, दोनों देशों की ओर से इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब पाकिस्तान और सऊदी अरब ने सितंबर 2025 में एक आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले को साझा खतरे के रूप में देखने पर सहमति जताई थी, जिसके बाद माना जा रहा है कि उनके सैन्य संबंध और मजबूत हो गए। हाल ही में पाकिस्तान वायुसेना प्रमुख जहीर अहमद बाबर सिद्दीकी का सऊदी अरब दौरा भी इसी संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
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बढ़ रहीं सऊदी अरब की रक्षा जरूरतें
अमेरिका की मध्य पूर्व में भविष्य की भूमिका को लेकर अनिश्चितता के बीच सऊदी अरब अपने रक्षा साझेदारों में विविधता लाने पर विचार कर रहा है। जेएफ-17 जैसे अपेक्षाकृत सस्ते और कम रखरखाव वाले लड़ाकू विमान उसकी जरूरतों के अनुकूल हो सकता है। हालांकि, इससी क्षमताओं को लेकर अब भी संशय है। कहीं ऐसा न हो कि इसी चीनी कबाड़ का सौदा करके सऊदी अरब को बाद में पछताना पड़े।
पाकिस्तान खुद को एक भीखमंगे देश की छवि से बाहर निकालकर रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, अगर हथियार निर्यात में निरंतर वृद्धि होती है तो इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सकता है और IMF पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
