लालू यादव जब केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे, उस समय यह घोटाला हुआ था। इस मामले में लालू यादव और उनके परिवार पर आरोप है कि उन्होंने रेलवे में नौकरी देने के बदले लोगों से उनकी जमीनें अपने नाम करवा लीं। इस मामले में आज यानी शुक्रवार 9 जनवरी 2026 को लालू यादव और उनके पूरे परिवार के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए हैं।
लालू यादव जब साल 2004 से 2009 तक केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे, उस समय का यह मामला है। सीबीआई ने IRCTC होटलों के लिए कॉन्ट्रैक्ट देने में अनियमितता बरतने के मामले में लालू यादव के खिलाफ केस दर्ज किया था।
दिल्ली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोप तय किए हैं। लालू परिवार के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के खिलाफ धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
आयकर विभाग और सीबीआई ने साल 1998 में यह मामला दर्ज किया था। इसमें कहा गया कि लालू यादव की संपत्ति उनकी ज्ञात स्रोतों से ज्यादा ज्यादा है। इस मामले को चारा घोटाले से जोड़कर देखा गया। इस मामले में लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी को सह-अभियुक्त बनाया गया।
चारा घोटाला बिहार के सबसे बड़े घोटालों में से एक रहा है। इसमें लालू यादव ही नहीं उनसे पहले मुख्यमंत्री रहे जगन्ननाथ मिश्र भी जेल गए थे। 1990 के दशक में बिहार ट्रेजरी में लगभग 950 करोड़ के चारा घोटाला हुआ। उस समय लालू यादव मुख्यमंत्री और एनिमल हस्बेंड्री मंत्री थे।
चारा घोटाला से जुड़े कई मामलों में लालू यादव अदालत से दोषी करार दिए जा चुके हैं। इनमें उन पर नकली बिलों के जरिए पब्लिक फंड निकालने का आरोप था।
चारा घोटाला के चाइबासा ट्रेजरी केस में लालू यादव को 5 साल की जेल की सजा हो चुकी है। देवघर ट्रेजरी केस में 3.5 साल और चाईबासा के दूसरे मामले में उन्हें 5 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। दुमका और डोरांडा ट्रेजरी केस में भी उन्हें 5 साल की सजा सुनाई जा चुकी है।
इन चार के अलावा भी लालू यादव पर कई छोटे-मोटे केस दर्ज हैं। इनमें चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन सहित कई मामले हैं।