Pakistan Black Day: पाकिस्तान में हालात पिछले कई दिनों से खराब है। जनता सड़कों पर है और शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। इस बीच देश में आज ब्लैक डे घोषित किया गया है। यह घोषणा पाकिस्तान के पत्रकारों की तरफ से की गई। दरअसल, पाकिस्तान में अत्याचार और हिंसा प्रभावित पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में इंटरनेट बंद होने से तनाव के बीच, इस्लामाबाद पुलिस ने नेशनल प्रेस क्लब (NPC) में छापा मारा, जहां कई पत्रकारों पर हमला किया गया। पाकिस्तानी मीडिया की खबरों के अनुसार, राजधानी इस्लामाबाद के बीचों-बीच स्थित इस क्लब पर पुलिस ने इसलिए छापा मारा ताकि आजाद जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के आह्वान पर प्रदर्शन की खबर लिख रहे कश्मीरी पत्रकारों को गिरफ्तार किया जा सके। यह वही संस्था है जिसने शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ POK में प्रदर्शन का आह्वान किया था।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लाठी-डंडे से लैस पुलिसकर्मी प्रेस क्लब के कैफेटेरिया में घुसते और वहां बैठे लोगों पर हमला करते दिख रहे हैं। वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मियों द्वारा बाहर घसीटे जाने की भी तस्वीरें हैं।
एक अन्य वायरल तस्वीर में एक पत्रकार एक हाथ से कैमरा पकड़े हुए और दूसरे हाथ से पुलिस वाले के पकड़ से अपनी गर्दन छुड़ाने की कोशिश करते हुए दिखाई दे रहा है।
'पुलिस वाले गुंडों की तरह'
एशिया वन टीवी चैनल में काम करने वाले पत्रकार अनास मलिक ने डॉन को बताया कि पुलिस जम्मू कश्मीर एसोसिएशन ऑफ एक्टिविस्ट (JAAC) के विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रहे कश्मीर के पत्रकारों को गिरफ्तार करने के लिए क्लब में आई थी। उन्होंने कहा कि पुलिस वाले गुंडों की तरह बर्ताव कर रहे थे।
एक अन्य पत्रकार हमीद मीर ने बताया कि पुलिस JAAC के सदस्यों को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी और उन्होंने कैफेटेरिया में मौजूद पत्रकारों को निशाना बनाया।
क्यों गलती से हुआ ये?
खबरों के अनुसार यह कार्रवाई गुरुवार को हुई, जब PoK के लोग प्रेस क्लब के बाहर क्षेत्र में अत्याचारों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। पाकिस्तान टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने गलती से पत्रकारों को प्रदर्शनकारी समझ लिया और उन पर हमला कर दिया।
पत्रकारों पर हुए हमले में होगा एक्शन- मोहसिन नकवी
पाकिस्तान ह्यूमन राइट्स कमीशन (HRCP) ने पत्रकारों के खिलाफ बल प्रयोग की निंदा की और मामले की जांच की मांग की। पुलिस की इस कार्रवाई की पाकिस्तान भर में कड़ी आलोचना हुई, जिसके बाद गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने घटना की जांच के आदेश दिए। एक बयान में नकवी ने कहा कि उन्होंने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का संज्ञान ले लिया है और इस्लामाबाद के पुलिस महानिरीक्षक से रिपोर्ट मांगी है। डॉन के अनुसार, उन्होंने कहा, 'पत्रकारों के खिलाफ हिंसा किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इस घटना में शामिल अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।'वहीं, इस घटना ने पाकिस्तान में प्रेस की आजादी और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचारों को लेकर बढ़ती चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
