Pakistan IMF Debt Proposals:पाकिस्तान डिफॉल्टर बनने वाला है ? इस बात की संभावना अब काफी तेजी से बढ़ती जा रही है। क्योंकि इकोनॉमिक रिवाइवल के लिए उसकी आखिरी उम्मीद IMF ने झटका दे दिया है। पाकिस्तान सरकार के साथ 10 दिन तक चली मीटिंग के बाद भी IMF ने उसे कर्ज देने के लिए मना कर दिया है। और इस बीच पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार 3 अरब डॉलर से नीचे आ गया है। और इससे वह केवल दो हफ्ते से कम समय की अपनी आयात जरूरतों को पूरा कर सकता है।
पाक को क्यों नहीं मिल पा रहा है राहत पैकेज
आर्थिक संकट के गुजर रहा पाकिस्तान राहत पैकेज के तहत IMF से कर्ज की लगातार मांग कर रहा है। इसके तहत उसे IMF से 1.1 अरब डॉलर की एक और किश्त मिलने की उम्मीद है। असल में 2019 में इमरान खान की सरकार के समय IMF ने राहत पैकेज के तहत 6 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद देने का वादा किया था। लेकिन पाक के कमजोर आर्थिक हालात और सब्सिडी आधारित नीतियों की वजह से IMF कर्ज देने से कतरा रहा है। राहत पैकेज न मिलने से पाकिस्तान के पास वह केवल दो हफ्ते से कम समय की अपनी आयात जरूरतों को पूरा कर सकता है। पाक के अखबार डॉन के अनुसार 3 फरवरी पाक के पास केवल 2.91 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बचा हुआ था।
पूरी करनी होगी शर्तें
रॉयटर्स की खबर के अनुसार 13 फरवरी को एक बार पाक और IMF के बीच वर्चुअल स्तर पर बातचीत शुरू हुई है। इस बीत पाक को राहत पैकेज के लिए IMF कई सख्त शर्तों को पूरा करना होगा। इसके तहत IMF का कहना है कि पाकिस्तान पहले से ही 900 अरब डॉलर सर्कुलर कर्ज का सामना कर रहा है। ऐसे में पाकिस्तान से अलग-अलग टैक्स के जरिए 170 अरब रुपए वसूलने की सलाह दी गई है। इसमें पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ाने, बिजली की कीमतें बढ़ाने से लेकर दूसरे कदम उठाने होंगे। अगर वह ऐसा करता है तो उसका पूरा बोझ आम जनता पर पड़ने वाला है।
एक अहम शर्त यह है कि पाकिस्तान के पास किसी भी हाल में विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की कमी नहीं होनी चाहिए। जबकि वह 10 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। साथ ही पाक से निर्यात पर टैक्स छूट देने की शर्त रखी गई है।
