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जेल से बाहर आने वाले हैं इमरान खान? शहबाज शरीफ सरकार और PTI ने बातचीत पर जताई सहमति

Pakistan News: क्या पाकिस्तान के पूर्व मुख्यमंत्री इमरान खान को जेल से रिहाई मिलेगी? पाक सरकार और इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (PTI) ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। विज्ञप्ति में कहा गया कि दोनों समितियों ने सद्भावना व्यक्त करते हुए कहा कि संसद मुद्दों को सुलझाने के लिए उपयुक्त मंच है।

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जेल में बंद हैं पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान।

World News: पाकिस्तान सरकार और विपक्षी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने सोमवार को अपनी पहली बैठक में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई सहित विवादास्पद मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। सरकार और पीटीआई का प्रतिनिधित्व करने वाली समितियों के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित वार्ता की अध्यक्षता नेशनल असेंबली (एनए) के अध्यक्ष अयाज सादिक ने की, जिन्होंने पिछले सप्ताह मौजूदा राजनीतिक तनाव को कम करने के लिए दोनों पक्षों के प्रयासों में सहयोग देने की घोषणा की थी।

दोनों पक्षों के प्रयासों में सहयोग देने की घोषणा

सरकारी पक्ष से उपस्थित लोगों में उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार, प्रधानमंत्री के राजनीतिक सहयोगी राणा सनाउल्लाह, सीनेटर इरफान सिद्दीकी, पूर्व प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ, पूर्व मंत्री नवीद कमर, सांसद फारूक सत्तार और निजीकरण मंत्री अलीम खान शामिल थे। पीटीआई का प्रतिनिधित्व पूर्व स्पीकर असद कैसर, साहिबजादा हामिद रजा और सीनेटर राजा नासिर अब्बास ने किया। उन्होंने घोषणा की कि अगला सत्र दो जनवरी को होगा और पीटीआई की टीम अगली बैठक में अपनी मांगों का एक चार्टर पेश करेगी।

उन्होंने बैठक के बाद कहा, “हमने अतीत और वर्तमान के बारे में चर्चा की और मुझे उम्मीद है कि अगर हम देश की बेहतरी के लिए मिलकर काम करेंगे तो इससे राजनीतिक स्थिरता मजबूत होगी, लोकतंत्र मजबूत होगा और पाकिस्तान के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।”

वार्ता के संबंध में विज्ञप्ति में क्या कुछ कहा गया?

सीनेटर इरफान सिद्दीकी ने वार्ता के संबंध में विज्ञप्ति पढ़ी जिसमें दोनों पक्षों ने वार्ता को सकारात्मक बताया तथा वार्ता जारी रखने के महत्व पर बल दिया। विज्ञप्ति में कहा गया कि दोनों समितियों ने सद्भावना व्यक्त करते हुए कहा कि संसद मुद्दों को सुलझाने के लिए उपयुक्त मंच है। पीटीआई के कैसर ने सदस्यों को बताया कि उनकी समिति के कई सदस्य अदालती कार्यवाही के कारण उपस्थित नहीं हो सके।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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