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'मेरा नाम 'नो फ्लाई' में डाल दीजिए, नवाज शरीफ की तरह पाकिस्तान छोड़कर नहीं भागूंगा...' देश छोड़ने के दावों पर बोले इमरान खान

Pakistan News: पाकिस्तान रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हाल ही में यह कहने के बाद अटकलें शुरू हो गईं कि इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) विदेशी शक्तियों से उन्हें को रिहा कराने और उन्हें विदेश भेजने का आग्रह कर रही है।

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इमरान खान।

Pakistan News: जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश छोड़ने के दावों को एक बार फिर खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि वह पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की तरह पाकिस्तान छोड़कर नहीं भागेंगे। बता दें, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हाल ही में यह कहने के बाद अटकलें शुरू हो गईं कि इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) विदेशी शक्तियों से उन्हें को रिहा कराने और उन्हें विदेश भेजने का आग्रह कर रही है।

अब इमरान खान की ओर से इन अटकलों को खारिज किया गया है। जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के हवाले से कहा गया है कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं और पाकिस्तान में ही रहेंगे। वह किसी भी कीमत पर देश नहीं छोड़ेंगे।

मेरा नाम नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दीजिए

इमरान खान के एक्स पर जारी बयान में कहा कि उनके हवाले से कहा गया है, मैं कभी देश छोड़कर नहीं भागूंगा। मेरा नाम स्थायी रूप से नो-फ्लाई सूची में डाल दीजिए। मैं कहीं नहीं जा रहा। पहले पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ ने देश छोड़ा, अब उनकी बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम शरीफ भी चली गयीं। पीएमएल-एन के अनुसार मरियम चिकित्सा के लिए बृहस्पतिवार को स्विटजरलैंड रवाना हुई थीं। इससे पहले उनके पिता नवाज पिछले महीने चिकित्सा उपचार के लिए लंदन गए थे। बता दें, नवाज शरीफ ब्रिटेन में चार साल के आत्म-निर्वासन के बाद अक्टूबर 2023 में पाकिस्तान लौटे थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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