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मेहरबानी करके घर आएं और 40 आतंकी ढूंढ लें... शरीफ सरकार को इमरान खान का जवाब

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 17, 2023, 08:25 PM IST

Pakistan Crisis: इमरान खान ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि अगर 40 आतंकी मेरे घर में हैं तो आएं और उन्हें ढूंढ लें। अगर ऐसा है तो मेरी जान को भी खतरा है। इसलिए मेहरबानी करके घर आएं और उन्हें ढूंढ लें।

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इमरान खान

Photo : BCCL

Pakistan Crisis: पाकिस्तान की राजनीति में इस समय घमासान मचा हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर शहबाज शरीफ सरकार आए दिन नए-नए फरमान जारी कर रही है। अब शरीफ सरकार की ओर से इमरान खान को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है। कहा गया है कि इमरान ने अपने घर में 40 आतंकियों को पनाह दी है। पाकिस्तान पुलिस ने इमरान के लाहौर के जमान पार्क स्थित घर को पूरी तरह से घेर लिया है।

इस बीच इमरान खान को जवाब सामने आया है। इमरान खान ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि अगर 40 आतंकी मेरे घर में हैं तो आएं और उन्हें ढूंढ लें। इमरान खान ने अपने वीडियो में कहा, मुझे पता चला है कि मेरे घर में 40 आतंकी हैं, जिन्हें मैंने पनाह दी है। अगर ऐसा है तो मेरी जान को भी खतरा है। इसलिए मेहरबानी करके घर आएं और उन्हें ढूंढ लें।

धाव न बोलें, सर्च वारंट लेकर आएं

इमरान खान ने कहा, जिस तरह से मेरे लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। ऐसा न करें। मेरे घर आएं लेकिन धावा न बोलें। सर्च वारंट लेकर आएं, मैं खुद आपको पूरा घर दिखाऊंगा। इमरान खान ने कहा, यह पूरी साजिश मेरे लोगों और मेरी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को खत्म करने के लिए की जा रही है।

मैं 27 साल से पार्टी चला रहा

इमरान खान ने कहा मैं 27 साल से तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी चला रहा हूं। मुझे बता दें कभी मैंने एक बार भी कहा हो कि कानून के खिलाफ चलें या संविधान के खिलाफ जाएं। मेरा एक भी बयान दिखा दें। मैंने हमेशा कहा है कि अगर हमारी फौज कमजोर हुई तो हमारा वही हाल होगा जो मुलसमान मुल्कों का है लीबिया, सीरिया,सोमालिया, अफगानिस्तान, इराक, सारे मुल्क तबाह हो गए। हमें गर्व था कि हमारी फौज मजबूत है। अगर मैं फौज को कमजोर करूंगा तो मैं कमजोर होऊंगा। मीडिया पूरी कोशिश कर रही है कि तहरीक-ए-इंसाफ और पाकिस्तानी फौज का आमना-सामना हो जाए। मैं कहता हूं कि अगर ऐसा होगा तो जीतेगा कौन?

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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