पाकिस्तान में तख्तापलट का इतिहास रहा है, अब एक बार फिर से इसकी आहट सुनाई देने लगी है। शरीफ सरकार ने जिस सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का कद हाल ही में बढ़ाया था, अब उसी की निगाह सत्ता पर है। खबर है कि सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर राष्ट्रपति बनने की तैयारी कर रहा है। वर्तमान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की छुट्टी करने की तैयारी करके असीम मुनीर पूरी सत्ता हाथ में लेने की फिराक में है। इन अटकलों के बाद अब पाकिस्तानी की शरीफ सरकार ने इस मामले पर मुंह खोला और इसे गलत बताने की कोशिश की है।
शरीफ सरकार ने किया खारिज
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही खबरों के बीच ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से निराधार और दुर्भावनापूर्ण अफवाहें हैं। उन्होंने कहा- "राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख को निशाना बनाकर चलाए जा रहे इस अभियान के पीछे कौन है, इसकी हमें पूरी जानकारी है।" हालांकि उन्होंने इस संदर्भ में किसी का नाम नहीं लिया।
पाकिस्तान में तख्तापलट का इतिहास
- पाकिस्तान में अब तक कुल तीन बड़े तख्तापलट हुए हैं — 1958, 1977, और 1999।
- हर तख्तापलट के बाद सेना ने सत्ता पर कब्जा किया और कुछ वर्षों तक शासन किया।
- ये तख्तापलट देश की राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालते रहे हैं।
तीन तख्तापलट, तीनों सेना ने किया
पाकिस्तान के बनने के बाद से देश की राजनीति में कई बार सैन्य हस्तक्षेप देखने को मिला है। अब तक पाकिस्तान में तीन बड़े तख्तापलट हो चुके हैं, जिन्होंने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित किया। पाकिस्तान में पहला तख्तापलट 7 अक्टूबर 1958 को हुआ। उस समय फील्ड मार्शल अयूब खान ने देश में आपातकाल घोषित कर तत्कालीन प्रधानमंत्री फजल इलाही चौधरी की सरकार को समाप्त कर दिया।अयूब खान ने स्वयं को राष्ट्रपति घोषित कर सेना की मदद से सरकार पर काबिज हो गए। यह पाकिस्तान का पहला सैन्य तख्तापलट था। इसके बाद 1977 में जनरल मुहम्मद ज़िया-उल-हक ने तख्तापलट किया और फिर 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने तीसरी बार तख्तापलट किया।
