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बच्चों के सामने फ्रांसीसी महिला का पाकिस्तानी नागरिकों ने किया था गैंगरेप, कोर्ट ने बरकरार रखी फांसी की सजा

यह मामला 9 सितंबर 2020 का है, जब पाकिस्तानी मूल की एक फ्रांसीसी महिला अपने तीन बच्चों के साथ सियालकोट-लाहौर मोटरवे पर यात्रा कर रही थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, देर रात सफर के दौरान उनकी कार का ईंधन खत्म हो गया, जिससे परिवार सड़क किनारे फंस गया।

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2020 की है यह घटना। -प्रतीकात्मक तस्वीर

Photo : PTI

Pakistan News: फ्रांस की महिला पर्यटक के साथ गैंगरेप करने वाले दो पाकिस्तानी नागरिकों को फांसी की सजा बरकरार रहेगी। लाहौर हाई कोर्ट ने बुधवार को आबिद अली और शफाकत अली की अर्जी खारिज कर दी। इन दोनों ने 2021 के एंटी-टेररिज्म कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने दोनों को गैंग रेप, अपहरण, लूट और आतंकवाद से जुड़े अपराधों में दोषी करार दिया था। इन दोनों ने लाहौर के करीब फ्रांसीसी महिला का उसके तीन बच्चों के सामने दुष्कर्म किया था। महिला अपने बच्चों के साथ कार से जा रही थी। इसी दौरान रास्ते में उसकी कार का ईंधन खत्म हो गया था।

सड़क किनारे फंस गया था परिवार

यह मामला 9 सितंबर 2020 का है, जब पाकिस्तानी मूल की एक फ्रांसीसी महिला अपने तीन बच्चों के साथ सियालकोट-लाहौर मोटरवे पर यात्रा कर रही थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, देर रात सफर के दौरान उनकी कार का ईंधन खत्म हो गया, जिससे परिवार सड़क किनारे फंस गया। जांचकर्ताओं के मुताबिक, महिला सहायता का इंतजार करते हुए कार के अंदर दरवाजे बंद करके बैठी थी। आरोप है कि हमलावरों ने कार का शीशा तोड़ा, महिला को बाहर घसीटा और उसके बच्चों के सामने बंदूक की नोक पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

परिवार से नकदी, आभूषण, बैंक कार्ड लूटकर फरार हुए

हमलावर परिवार से नकदी, आभूषण और बैंक कार्ड लूटकर फरार हो गए। हमलावरों की तलाश कुछ ही दिनों में पूरी हो गई। जांच एजेंसियों ने मोबाइल फोन डेटा के जरिए संदिग्धों तक पहुंच बनाई और बाद में घटनास्थल से मिले डीएनए सबूतों के आधार पर आरोपियों को अपराध से जोड़ा।जांचकर्ताओं ने बताया कि पीड़िता ने कानूनी प्रक्रिया के दौरान दोनों आरोपियों की पहचान की थी। दोषियों में से एक, शफकत अली, ने कथित तौर पर मजिस्ट्रेट के सामने अपना जुर्म भी कबूल किया था।

'महिला रात में यात्रा क्यों कर रही थी?'

इन्हीं सबूतों के आधार पर मार्च 2021 में एक आतंकवाद निरोधी अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उन्हें उम्रकैद और अन्य जेल सजाएं भी दी गई थीं। इस जघन्य अपराध के बाद पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन और भारी जनाक्रोश देखने को मिला। लोगों का गुस्सा उस समय और बढ़ गया था जब तत्कालीन लाहौर पुलिस प्रमुख उमर शेख ने यह सवाल उठाया था कि महिला रात में यात्रा क्यों कर रही थी और उसे दूसरा रास्ता अपनाना चाहिए था। उनके इस बयान की व्यापक आलोचना हुई थी।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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