Indus Waters Treaty: पहलगाम आतंकी हमला जो 22 अप्रैल 2025 (Pahalgam Attack 2025) को हुआ था। उसकी पहली बरसी के अवसर पर, भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) की स्थिति तनावपूर्ण और अनिश्चित बनी हुई है। पिछले एक साल में पाकिस्तान के लिए सिंधु जल संधि का निलंबन केवल एक कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि अस्तित्व का संकट बन गया है।
पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Attack 2025) के बाद से सिंधु जल संधि के निलंबन का एक वर्ष पूरा हो चुका है। इस एक साल में दोनों देशों के बीच जल कूटनीति के मोर्चे पर गहरी खाई पैदा हो गई है।
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और पानी की साझेदारी साथ-साथ नहीं चल सकते और इसे लेकर भारत की तरफ से कोई भी लचीला रुख अभी तक देखने को नहीं मिला है।
क्या हुआ इस 1 साल में वो जान लें-
संधि का निलंबन
2025 में हुए पहलगाम के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को आधिकारिक रूप से 'निलंबन' में डाल दिया था। भारत सरकार का दृढ़ रुख है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक यह संधि इसी स्थिति में रहेगी।
भारत का कूटनीतिक रुख
मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि भारत इस संधि को तब तक बहाल नहीं करेगा जब तक कि पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय कदम नहीं उठाए जाते। भारत का कहना है कि उसने 1960 में सद्भावना के साथ संधि पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन पाकिस्तान ने इसे आतंकवाद और छद्म युद्ध के जरिए लगातार कमजोर किया है।
पाकिस्तान ने इस पर कानूनी और कूटनीतिक तर्क दिए
पाकिस्तान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है। पाकिस्तान ने इस पर कानूनी और कूटनीतिक तर्क दिए हैं और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन के रूप में पेश करने की कोशिश की है। पाकिस्तान का दावा है कि संधि को एकतरफा कार्रवाई से निलंबित नहीं किया जा सकता, जबकि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को प्राथमिकता देते हुए इसे आवश्यक मान रहा है।

भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और पानी की साझेदारी साथ-साथ नहीं चल सकते
सिंधु जल संधि का भविष्य इस बात पर निर्भर
पहलगाम हमले के एक साल बाद भी, सिंधु जल संधि का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के प्रति अपना रवैया कितना बदलता है। भारत इस संधि को अब केवल एक जल बंटवारे का समझौता नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी व्यापक कूटनीतिक और रणनीतिक रणनीति का हिस्सा मानता है।
1 साल बाद कैसी है पाकिस्तान की स्थिति
पिछले एक साल में पाकिस्तान के लिए सिंधु जल संधि का निलंबन केवल एक कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि अस्तित्व का संकट बन गया है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार भारत के इस कदम को 'पानी का शस्त्रीकरण' करार दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने 1960 की इस ऐतिहासिक संधि का एकतरफा उल्लंघन किया है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।

संधि के निलंबन ने पाकिस्तान के किसानों की कमर तोड़ दी
पानी की बूंद-बूंद के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गुहार लगा रहा Pakistan
पहलगाम हमले के एक वर्ष बाद, सिंधु जल संधि का निलंबन महज कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत के उस नए कूटनीतिक 'डॉक्ट्रिन' का प्रमाण है, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता अस्वीकार्य है। एक तरफ पाकिस्तान पानी की बूंद-बूंद के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गुहार लगा रहा है, तो दूसरी तरफ भारत का अडिग रुख यह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि 'पानी और आतंकवाद' अब एक ही धारा में नहीं बह सकते।
पाकिस्तान की कृषि क्षेत्र का बड़ा आधार सिंधु जल प्रणाली पर निर्भर
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का लगभग 80% हिस्सा और कृषि क्षेत्र का बड़ा आधार सिंधु जल प्रणाली पर निर्भर है। निलंबन के कारण पाकिस्तान में सिंचाई के लिए अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे खाद्यान्न उत्पादन और अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है।

खाद्यान्न उत्पादन गिर गया है और महंगाई आसमान छू रही
संधि के निलंबन ने पाकिस्तान के किसानों की कमर तोड़ दी
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार और कृषि का अस्तित्व सिंधु जल प्रणाली पर टिका है। बीते एक साल में इस संधि के निलंबन ने पाकिस्तान के किसानों की कमर तोड़ दी है। पंजाब और सिंध प्रांतों के बड़े हिस्से में सिंचाई के लिए पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है, जिससे खाद्यान्न उत्पादन गिर गया है और महंगाई आसमान छू रही है। पाकिस्तान के लिए यह केवल पानी की कमी नहीं, बल्कि एक गंभीर खाद्य सुरक्षा और आर्थिक संकट का रूप ले चुका है।
यह केवल दो देशों के बीच 'जल विवाद' नहीं
यह केवल दो देशों के बीच जल विवाद नहीं है, बल्कि यह एक उभरती हुई शक्ति और एक अस्थिर देश के बीच के बदलते समीकरणों का आइना है। अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है-क्या वह आतंकवाद का रास्ता छोड़कर शांतिपूर्ण वार्ता की मेज पर आएगा, या फिर जल-संकट की आग में अपनी अर्थव्यवस्था को और झुलसने देगा?
