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जब तक रिहा किए जाने वाले बंधकों की सूची नहीं देता हमास, तब तक संघर्ष विराम प्रभावी नहीं; नेतन्याहू ने कर दिया साफ

Israel Hamas Ceasefire Deal: इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को ये साफ शब्दों में कह दिया है कि कि जब तक हमास द्वारा रिहा किए जाने वाले बंधकों की सूची नहीं मिल जाती, तब तक गाजा में संघर्ष विराम प्रभावी नहीं होगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल-हमास के बीच होने वाला युद्धविराम समझौता फंस जाएगा।

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इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू। (File Image)

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Netanyahu Clear his Stand: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि हमास जब तक कई फलस्तीनी कैदियों के बदले में रिहा किए जाने वाले तीन बंधकों की सूची नहीं दे देता, तब तक गाजा में संघर्ष विराम प्रभावी नहीं होगा।

इजरायली पीएम नेतन्याहू ने युद्धविराम समझौते पर साफ किया अपना रुख

नेतन्याहू ने एक बयान में कहा कि उन्होंने सेना को निर्देश दिया है कि स्थानीय समयानुसार सुबह आठ बजकर 30 मिनट पर प्रभावी होने वाला संघर्ष विराम ‘‘तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक इजरायल के पास रिहा किए जाने वाले उन बंधकों की सूची नहीं आती, जिसे हमास ने उपलब्ध कराने का वादा किया था।’’ उन्होंने एक रात पहले भी इसी तरह की चेतावनी दी थी।

हमास के साथ विवाद के कारण संघर्ष विराम प्रभावी होने में हो रही देरी

इजरायल की सेना ने कहा कि वह गाजा पट्टी पर ‘‘हमले जारी रखे हुए है’’ क्योंकि हमास के साथ विवाद के कारण संघर्ष विराम प्रभावी होने में देरी हो रही है। सेना के मुख्य प्रवक्ता रियर एडमिरल डैनियल हैगरी ने कहा कि जब तक हमास रविवार को रिहा किए जाने वाले तीन बंधकों के नाम नहीं सौंप देता, तब तक संघर्ष विराम प्रभावी नहीं होगा। हमास ने नाम सौंपने में देरी के लिए ‘‘तकनीकी कारणों’’ का हवाला दिया। उसने एक बयान में कहा कि वह पिछले सप्ताह घोषित किए गए संघर्ष विराम समझौते के लिए प्रतिबद्ध है।

इस बीच, इजरायल ने सूचना जारी की कि एक विशेष अभियान में 2014 के इजरायल-हमास युद्ध में मारे गए सैनिक ओरोन शॉल का शव बरामद किया गया है। शॉल और एक अन्य सैनिक हैदर गोल्डिन के शव 2014 के युद्ध के बाद गाजा में थे और मृतक सैनिकों के परिवारों के अनुरोध के बावजूद उन्हें वापस नहीं किया गया। संघर्ष विराम के प्रभावी होने से कुछ घंटे पहले यह विशेष अभियान चलाया गया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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