दुनिया

कौन है हिजबुल्लाह चीफ नसरल्लहा? जिसकी मौत मिडिल ईस्ट से टाल देगी एक बड़ा संकट, इजराइली हमले में हो गया खात्मा!

Hezbollah Chief Nasrallah Killed: हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच जारी हुए हमलों ने मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की आशंका को जन्म दिया है। ऐसे में अगर नसरल्लाह के मारे जाने की खबरें सही होती हैं तो हिजबुल्लाह को इजराइल के सामने घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिससे मिडिल ईस्ट में एक बड़ा संकट खत्म हो सकता है।

Image

हिजबुल्लाह चीफ नसरल्लाह।

Photo : AP

Hezbollah Chief Nasrallah Killed: लेबनान में इन दिनों तबाही का दौर जारी है। इजराइल यहां हिजबुल्लाह पर कहर बनकर टूटा है और शायद उसने अपने इतिहास के सबसे भीषण और घातक हवाई हमले किए हैं। बीते एक सप्ताह से इजराइल हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है और एक-एक कर उसके कई बड़े नेताओं को मौत की नींद सुला चुका है। अब बड़ी खबर हिजबुल्लाह चीफ नसरल्लाह को लेकर आई है।

खबर है कि इजराइल बेरूत में कुछ इमारतों को निशाना बनाया था। इसमें एक इमारत वह भी थी, जहां हिजबुल्लाह चीफ नसरल्लाह मौजूद था। कहा जा रहा है कि इजराइल के मिसाइल हमलों के बाद नसरल्लाह से संपर्क नहीं हो पा रहा है और उसकी मौत हो गई है। हालांकि, इजराइल और न ही हिजबुल्लाह की ओर से इसकी पुष्टि की गई है। नसरल्लाह के एक करीबी ने कहा है कि वह सुरक्षित हैं।

...तो टल जाएगा बड़ा संकट

हिजबुल्लाह चीफ नसरल्लाह को लेकर आ रही मीडिया रिपोर्ट्स अगर सही साबित होती हैं, तो मिडिल ईस्ट से एक बड़ा संकट टल सकता है। दरअसल, बीते कुछ दिनों से दोनों के बीच जारी हुए हमलों ने मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की आशंका को जन्म दिया है। ऐसे में अगर नसरल्लाह के मारे जाने की खबरें सही होती हैं तो हिजबुल्लाह को इजराइल के सामने घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिससे मिडिल ईस्ट में एक बड़ा संकट खत्म हो सकता है।

नसरल्लाह कैसे बना हिजबुल्लाह चीफ?

  • हसन नसरल्लाह का जन्म 31 अगस्त, 1960 को बेरूत के उत्तरी बुर्ज हम्मूद उपनगर में हुआ था। उसका पिता एक गरीब किराना व्यापारी था और नसरल्लहा के आठ भाई-बहन थे।
  • 1975 में लेबनान में हुए गृहयुद्ध ने नसरल्लाह को बहुत अधिक प्रभावित किया। वह इजरायली कब्जे का विरोध करने वाले शिया मिलिशिया अमल में शामिल हो गया और इसके बाद हिजबुल्लाह में आ गया।
  • फरवरी 1992 में इजराइली हमले में हिजबुल्लाह के उस वक्त के नेता अब्बास अल-मुसावी की मौत हो गई थी, जिसके बाद नसरल्लहा इस संगठन का चीफ बना और धीरे-धीरे लेबनान के साथ-साथ उसने मिडिल ईस्ट में हिजबुल्लाह का प्रभाव बढ़ाया।
  • हिजबुल्लाह चीफ नसरल्लाह के ठिकानों का पता उसके अपने लोगों को भी नहीं होता। कहा जाता है वह कभी एक स्थान पर नहीं ठहरता और अपनी लोकेशन बदलता रहता है।
  • नसरल्लहा अपने आक्रामक भाषणों के लिए जाना जाता है और लेबनानी की राजनीति में भी उसका खास प्रभाव है। बीते कई सालों से नसरल्लाह लोगों के सामने नहीं आया, उसके भाषणों को रिकॉर्ड कर प्रसारित किया जाता है।
  • नसरल्लाह शादीशुदा है और उनके चार बच्चे हैं। उनका सबसे बड़ा बेटा जो हिजबुल्लाह का लड़ाका था सितंबर 1997 में इजरायल द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में मारा गया था।
Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article