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रूस आर्कटिक हितों की रक्षा के लिए तैयार, नाटो अभ्यास से नाराज मॉस्को का बयान

NATO exercises: अमेरिका और उसके सहयोगी 250 से अधिक आधुनिक मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट लाने की योजना बना रहे हैं, जिन्हें 2030 तक आर्कटिक ऑपरेशन के लिए तैनात किया जा सके।

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन।

Photo : ANI

NATO exercises: रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि रूस आर्कटिक क्षेत्र में अपने हितों की रक्षा के लिए तैयार है। बता दें नाटो इस क्षेत्र में अपना सैन्य अभ्यास बढ़ा रहा है। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, लावरोव ने डॉक्यूमेंट्री सीरीज 'सोवियत ब्रेकथ्रू' को दिए इंटरव्यू में कहा, हम देख रहे हैं कि कैसे नाटो आर्कटिक में संभावित संकटों से संबंधित अभ्यासों को बढ़ा रहा है। हमारा देश सैन्य, राजनीतिक और मिलिट्री-टेक्निकल मोर्चों पर अपने हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

अमेरिकी रक्षा विभाग ने जुलाई में अपनी आर्कटिक रणनीति का एक अपडेटेड वर्जन जारी किया था। इसमें अमेरिकी सहयोगियों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास की योजनाओं की रूपरेखा शामिल थी। रणनीति में भागीदारों, स्थानीय उद्योगों और अलास्का की मूल जनजातियों के साथ मिलकर काम करने के इरादे पर भी प्रकाश डाला गया था ताकि क्षेत्र में साझा सुरक्षा बढ़ाई जा सके।

पेंटागन ने बनाई नई रणनीति

पेंटागन की रणनीति के मुताबिक, अमेरिका और उसके सहयोगी 250 से अधिक आधुनिक मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट लाने की योजना बना रहे हैं, जिन्हें 2030 तक आर्कटिक ऑपरेशन के लिए तैनात किया जा सके। इस महीने की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी और मैरीटाइम कॉलेजियम के अध्यक्ष निकोलाई पेत्रुशेव ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी रूस की सीमाओं पर दबाव बढ़ा रहे हैं और लगातार उसकी रक्षा क्षमताओं का परीक्षण कर रहे हैं। पेत्रुशेव ने अमेरिका पर आर्कटिक में सैन्यीकरण करने का आरोप लगाया, ताकि उत्तरी क्षेत्रों में रूसी आर्थिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न की जा सके।

तनावपूर्ण हैं रूस और अमेरिका के रिश्ते

बता दें रूस यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस के रिश्ते और अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के साथ बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों से कृषि उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध दो वर्षों के लिए बढ़ा द‍िया। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रतिबंध 1 जनवरी, 2025 से 31 दिसंबर, 2026 तक चलेगा। यह पहली बार है जब इसे एक वर्ष से अधिक समय के लिए बढ़ाया गया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष पर पश्चिमी प्रतिबंधों के जवाब में अगस्त 2014 में मूल रूप से लागू किया गया यह प्रतिबंध अमेरिका, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और कनाडा के उत्पादों को प्रभावित करता है। बाद में प्रतिबंधों को यूक्रेन सहित अन्य यूरोपीय देशों तक बढ़ा दिया गया।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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