जापान के फुजिसावा शहर में मस्जिद के निर्माण को हंगामा मच गया है। इसे लेकर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया है। जापान के तटीय शहर फुजिसावा के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं, जिनमें हजारों निवासी शहर की पहली मस्जिद के निर्माण के विरोध में प्रदर्शन करते दिख रहे हैं।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में दिखाया गया है कि यह प्रदर्शन मामूली नहीं था, बल्कि इसमें बड़ी संख्या में लोग मस्जिद निर्माण के खिलाफ नारे लगा रहे थे और चिंता जता रहे थे कि प्रस्तावित ढांचा, जो लगभग ऐतिहासिक शिंटो मंदिरों से भी बड़ा बताया जा रहा है, जापानी विरासत के लिए उकसाने वाला कृत्य माना जा रहा है।
यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। जापान के कुछ हिस्सों में तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव, जिनमें बढ़ती मुस्लिम आबादी भी शामिल है, सांस्कृतिक भिन्नताओं और एकीकरण को लेकर बड़े पैमाने पर सार्वजनिक चर्चाओं का हिस्सा बन गए हैं। फुजिसावा में सार्वजनिक बैठकें बार-बार अराजकता में तब्दील हो गईं, जिसके लिए पुलिस हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी। अजान (प्रार्थना के लिए पुकार) और अनजान अंतिम संस्कार रीति-रिवाजों को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
इस विवाद ने X पर तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है, जहां दुनिया भर के उपयोगकर्ता जापान के दृष्टिकोण पर अपनी राय दे रहे हैं। एक यूजर ने कहा, जापान, इन्हें पकड़ो! इन्हें अपने देश में पैर जमाने मत दो। ये तिलचट्टों की तरह प्रजनन करते हैं, और आप इन्हें कभी खत्म नहीं कर पाएंगे। ये आपकी महिलाओं और बच्चों का सामूहिक बलात्कार करेंगे, जैसा कि उन्होंने ब्रिटेन और दुनिया के अन्य हिस्सों में किया है। शरिया कानून के तहत वे महिलाओं के साथ यही करेंगे। इस्लाम नहीं, शरिया कानून नहीं!
इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश और ईरान जैसे देशों से आप्रवासन (immigration) के कारण मुस्लिम आबादी बढ़ रही है। विवाह या व्यक्तिगत रुचि के कारण स्थानीय जापानी लोगों का इस्लाम अपनाना बढ़ रहा है।
2024-2025 के अनुमानों के अनुसार, जापान में लगभग 230,000 से 420,000 मुस्लिम रहते हैं। यह कुल जापानी आबादी का लगभग 0.28% से 0.30% है। इनमें से अधिकांश विदेशी प्रवासी हैं, जबकि लगभग 47,000-50,000 जापानी नागरिक हैं। ओसाका, टोक्यो, नागोया और योकोहामा जैसे प्रमुख शहरों में मुस्लिम आबादी अधिक है।
जापान में अब 110 से अधिक मस्जिदें और 130 से अधिक नमाज स्थल हैं। जापान में मुसलमानों को हलाल भोजन खोजने और मस्जिदों की उपलब्धता जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ता है।