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नरम पड़े मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू के तेवर, भारत के लिए कह दी बड़ी बात

India Maldives Relations: मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव के 59वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित एक आधिकारिक समारोह में कहा कि उनके देश के ऋण को चुकाने में चीन और भारत सबसे अधिक सहायता प्रदान करते हैं।

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मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू

Photo : AP

India Maldives Relations: मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने उनके देश की कमजोर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करने के लिए भारत और चीन का आभार व्यक्त किया है तथा द्वीपीय देश के ऋण संकट को दूर करने में नयी दिल्ली और बीजिंग के महत्व को रेखांकित किया।

मुइज्जू ने शुक्रवार को मालदीव के 59वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित एक आधिकारिक समारोह में कहा कि उनके देश के ऋण को चुकाने में चीन और भारत सबसे अधिक सहायता प्रदान करते हैं। समाचार पोर्टल अधाधू डॉटकॉम ने मुइज्जू के हवाले से कहा, मैं मालदीव के लोगों की ओर से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, हमारी आर्थिक संप्रभुता को कायम रखने और मालदीव के लोगों की खातिर इस प्रयास में उनके सहयोग के लिए चीन सरकार और भारत सरकार का आभार व्यक्त करता हूं।

भारत की 400 करोड़ की सहायत की सराहना की

इस दौरान मुइज्जू ने भारत द्वारा दी गई 400 करोड़ रुपये की सहायता की भी सराहना की। बता दें, मुइज्जू पिछले साल भारत विरोधी अभियान के सहारे सत्ता में आए थे। इस अभियान के दौरान, भारत द्वारा दान किए गए हेलीकॉप्टर और डोर्नियर विमान का संचालन करने वाले लगभग 80 भारतीय सैन्य कर्मियों को स्वदेश (भारत) बुलाने की मांग की गई थी। मुइज्जू ने शुक्रवार को कहा कि चीन ने ऋण की अदायगी पांच साल के लिए स्थगित करने को हरी झंडी दे दी है जो कि मालदीव को श्रीलंका जैसी (वित्तीय संकट की) स्थिति में जाने से बचाने के लिए एक बड़ी राहत होगी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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