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लाओस ने जारी किया अयोध्या के श्री राम लला को दर्शाते हुए दुनिया का पहला डाक टिकट, जानें खास बातें

World News: अयोध्या के श्री राम लला को दर्शाने वाला दुनिया का पहला डाक टिकट जारी किया गया है। विशेष स्मारक डाक टिकट सेट का अनावरण भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और लाओ पीडीआर के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सलेमक्से कोमासिथ ने वियनतियाने में एक समारोह के दौरान संयुक्त रूप से किया।

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अयोध्या के श्री रामलला को दर्शाते हुए दुनिया का पहला डाक टिकट जारी।

Ram Lalla of Ayodhya: लाओ पीडीआर (लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक) ने अयोध्या के श्री राम लला को दर्शाते हुए एक डाक टिकट जारी किया है, जिससे यह दुनिया का ऐसा पहला देश बन गया है जिसने राम लला को दर्शाते हुए एक डाक टिकट जारी किया है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की देश की यात्रा के दौरान यह जारी किया गया टिकट लाओ पीडीआर और भारत के बीच गहरे सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों को उजागर करता है।

दो अलग-अलग सेट में जारी हुए हैं डाक टिकट

विशेष स्मारक डाक टिकट सेट का अनावरण भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और लाओ पीडीआर के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सलेमक्से कोमासिथ ने लाओस की राजधानी वियनतियाने में एक समारोह के दौरान संयुक्त रूप से किया। लाओस में भारत के राजदूत प्रशांत अग्रवाल इस अवसर पर उपस्थित थे। यह कार्यक्रम डॉ. जयशंकर की आसियान बैठकों में भाग लेने के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई देश की यात्रा के दौरान हुआ।

इस डाक टिकट सेट में दो अलग-अलग टिकट हैं- एक टिकट पर लाओस की प्राचीन राजधानी लुआंग प्रबांग के भगवान बुद्ध की तस्वीर है, जो एक महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल भी है, जबकि दूसरे टिकट पर अयोध्या के भगवान श्री राम की तस्वीर है।

दोनों देशों के बीच लंबे समय से रहा मजबूत संबंध

भारत और लाओ पीडीआर के बीच बौद्ध धर्म का लंबे समय से एक मजबूत संबंध रहा है, क्योंकि लाओ पीडीआर वह देश है जहां बौद्ध धर्म की उत्पत्ति हुई और इस धर्म से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थल हैं, जिनका वैश्विक स्तर पर, खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया में अनुसरण किया जाता है।

भारत में रामायण एक पूजनीय महाकाव्य है और लाओटियन संस्कृति में भी इसका विशेष स्थान है। लाओस में, रामायण को रामकियेन या फ्रा लाक फ्रा राम की कहानी के रूप में जाना जाता है। इसे अक्सर शुभ अवसरों पर प्रदर्शित किया जाता है। डाक टिकट सेट की थीम, "लाओ पीडीआर और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाना" लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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