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जासूसी सैटेलाइट लॉन्चिंग से पीछे नहीं हटेंगे किम-जोंग-उन, दक्षिण कोरिया की चेतावनी के अलगे ही दिन उत्तर कोरिया ने कर दिया ऐलान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 21, 2023, 07:45 AM IST

Spy Satellite North Korea: दक्षिण कोरिया को डर है कि सैटेलाइट की लॉन्चिंग कर सियोल फिर से अग्रिम क्षेत्रों में हवाई निगरानी शुरू कर सकता है। दक्षिण कोरिया को यह भी शक है कि इस सैटेलाइट लॉन्च के लिए उत्तर कोरिया को रूस से तकनीकी सहायता मिल रही है।

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किम जोंग उन

Photo : BCCL

Spy Satellite North Korea: दक्षिण कोरिया और संयुक्त राष्ट्र संघ की चेतावनियों को दरकिनार कर उत्तर कोरिया ने जासूसी सैटेलाइट को लॉन्च करने के लिए कमर कस ली है। किम-जोंग-उन की तरफ से इसको लेकर आधिकारिक सूचना भी जारी कर दी गई है। संभावना जताई जा रही है कि उत्तर कोरिया इसी महीने के अंत तक सैटेलाइट का परीक्षण कर सकता है। ऐसा तब है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी उत्तर कोरिया पर उपग्रह प्रक्षेपण पर प्रतिबंध लगा रखा है।

बता दें, इस सैटेलाइट लॉन्च को लेकर सोमवार को दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया को चेतावनी दी थी। दक्षिण कोरियाई सेना की ओर से कहा गया था कि अगर सैटेलाइट लॉन्चिंग होती है तो यह सैन्य कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेगा। हालांकि, किम-जोंग-उन ने इस चेतावनी को दरकिनार कर दिया है। इसके बाद उत्तर कोरिया की ओर से जासूसी सैटेलाइट लॉन्च की औपचारिक सूचना जारी कर दी गई है।

क्यों सता रहा दक्षिण कोरिया को डर?

दक्षिण कोरिया को डर है कि सैटेलाइट की लॉन्चिंग कर सियोल एक अंतर-कोरियाई शांति समझौत को निलंबित कर सकता है ताथा प्रक्षेपण के जवाब में फिर से अग्रिम क्षेत्रों में हवाई निगरानी शुरू कर सकता है। दक्षिण कोरिया को यह भी शक है कि इस सैटेलाइट लॉन्च के लिए उत्तर कोरिया को रूस से तकनीकी सहायता मिल रही है। उसने आरोप लगाय है सियोल रूस के युद्ध में समर्थन के लिए पारंपरिक हथियारों की आपूर्ति के बदले अपनी परमाणु और अन्य सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए रूसी तकनीक प्राप्त कर रहा है।

UNSC ने लगाया है प्रतिबंध

बता दें, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया द्वारा किसी भी उपग्रह प्रक्षेपण पर प्रतिबंध लगा रहा है, क्योंकि वह इसे उसकी मिसाइल प्रौद्योगिकी का परीक्षण मानती है। उधर, दक्षिण कोरियाई सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि उत्तर कोरिया को दक्षिण कोरिया की निगरानी में सुधार के लिए एक जासूसी उपग्रह की जरूरत है। अगर वह सैटेलाइट लॉन्च में सफल हो जाता है तो दक्षिण कोरिया की जासूसी आसानी से कर सकता है। बता दें, उत्तर कोरिया तीसरी बाद इस सैटेलाइट को लॉन्च करने का प्रयास करेगा, पहले दो प्रयासों में लॉन्चिंग असफल रही थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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