Delhi News: कल यानी रविवार 6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बिल्डिंग गिर गई। इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद एक बार फिर दिल्ली में बिल्डिंग की सुरक्षा के साथ ही भवन निर्माण में होने वाली अनियमितताओं को लेकर प्रश्न उठने लगे हैं। चलिए जानते हैं दिल्ली में घर बनाने के लिए DDA ने क्या नियम तय किए हैं? इन नियमों को जानने के बाद गौर करें कि क्या आपका घर इन नियमों के अनुरूप बना है? क्या आपके आसपास के घर इन नियमों के अनुरूप बने हैं?
अगर आपको दिल्ली में घर बनाना हो तो आपके पास सिर्फ जमीन का टुकड़ा या प्लॉट होना ही काफी नहीं है। बल्कि इसके लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने कुछ नियम भी बनाए हैं, जिनके अनुसार ही आपके घर की बिल्डिंग का निर्माण होना चाहिए। DDA के Unified Building Bye-Laws (UBBL) 2016 और संबंधित स्थानीय निकाय के नियमों के अनुसार मकान बनाया जाना चाहिए। आपके घर के निर्माण में कई कारक अहम होते हैं, जिसमें प्लॉट का आकार, सड़क की चौड़ाई, जमीन का इस्तेमाल और कॉलोनी की स्थिति जैसे कई बातें शामिल हैं। कितनी जमीन पर निर्माण किया जा सकता है और मकान की ऊंचाई कितनी होगी, यह बातें भी UBBL के अनुसार तय हैं।
कितने बड़े प्लॉट में बना रहे हैं घर?
अगर आप दिल्ली में घर बनाना चाहते हैं तो बता दें कि यहां आपके पास कम से कम 32 स्वाक्वायर मीटर जमीन होना चाहिए, तभी आप उस प्लॉट में घर बना सकते हैं। जैसे-जैसे प्लॉट का क्षेत्रफल बढ़ता है, उसके साथ ही ग्राउंड कवरेज, FAR और घर बनाने से जुड़े नियम भी बदलते हैं।
प्लॉट के साइज के अनुसार ये हैं नियम
उदाहरण के लिए 100-250 स्क्वायर मीटर के प्लॉट के लिए सामान्यत: अधिकतम 75 फीसद ग्राउंड कवरेज और FAR 300 का प्रावधान है। जबकि 250 से 750 स्क्वायर मीटर के प्लॉट पर ग्राउंड कवरेज को 75 फीसद ही रहती है, लेकिन FAR 225 हो जाती है। 750 से 1500 स्क्वायर मीटर के प्लॉट में ग्राउंड कवरेज 50 फीसद और FAR 200 होगी।
इस तरह से कैलकुलेशन किया जाए तो मान लेते हैं आपके पास 200 स्क्वायर मीटर का प्लॉट है। ऐसे में 75 फीसद ग्राउंड कवरेज के लिहाज से सामान्य स्थिति में आप अधिकतम 150 स्क्वायर मीटर क्षेत्र में ही ग्राउंड लेवल पर निर्माण करवा सकते हैं।
बिल्डिंग के चारों ओर जगह छोड़ना जरूरी
याद रखें कि मकान बनाते समय प्लॉट के चारों ओर निर्धारित खुली जगह छोड़ने का नियम है। 100 स्क्वायर मीटर तक के प्लॉट के लिए सामने, पीछे और दोनों तरफ सेटबैक 0 मीटर रखा गया है। DDA के UBBL के अनुसार 100-250 स्क्वायर मीटर के प्लॉट में फ्रंट सेटबैक 3 मीटर का रखना जरूरी है। 250-500 स्क्वायर मीटर के प्लॉट में सामने और पीछे के साथ ही निर्माण के दोनों ओर भी 3-3 मीटर के सेटबैक रखा जाना चाहिए। जबकि बड़े प्लॉटों के लिए यह जरूरत और भी बढ़ सकती है। 50-100 स्क्वायर मीटर के निर्माण वाले कुछ रेजिडेंशियल प्लॉटों में कम से कम 2x2 मीटर का खुला आंगन रखने का प्रावधान है।
तय सीमा से ज्यादा न हो मकान की ऊंचाई
दिल्ली में अगर आप अपने प्लॉट में घर बना रहे हैं तो नियमानुसार घर की ऊंचाई अधिकतम 15 मीटर (49 फीट) तक हो सकती है। अगर आपके पार्किंग भी बनाई है तो Stilt Parking की स्थिति में यह सीमा 17.5 मीटर तक हो सकती है। 15 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाली आवासीय बिल्डिंग पर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट से जुड़े प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
पार्किंग के लिए भी नियम बनाए गए हैं
अपना मकान बना रहे हैं और पार्किंग भी बना रहे हैं तो बता दें कि इसके लिए भी नियम तय हैं। 250-300 स्क्वायर मीटर के प्लॉट में 2 ECS यानी इक्वीवैलेंट कार स्पेस का प्रावधान है। जबकि 300 स्क्वायर मीटर या इससे बड़े प्लॉटों में सामान्य तौर पर प्रत्येक 100 स्क्वायर मीटर बिल्ड-अप एरिया पर 1 ECS के आधार पर पार्किंग की जरूरत हो सकती है। हालांकि, हालात के अनुसार पार्किंग से जुड़े अन्य नियम भी लागू हो सकते हैं। बेसमेंट का इस्तेमाल किसी दूसरी गतिविधि के लिए करने पर FAR और दूसरी अनुमतियां प्रभावित हो सकती हैं। नॉन हैबिटेबल स्टिल्ट पार्किंग एरिया को भी कुछ शर्तों के तहत FAR से बाहर रखा जाता है।
बाउंड्री वॉल कितनी ऊंची है?
अगर आप दिल्ली में अपने प्लॉट पर घर बना रहे हैं तो यह जान लेना भी जरूरी है कि बाउंड्री वॉल का भी नियम है। आपकी फ्रंट बाउंड्री और सॉलिड वाल की ऊंचाई अधिकतम 1.5 मीटर तक ही हो सकती है। इससे ऊपर के हिस्से पर आप ग्रिल लगा सकते हैं, जाली या फल-फूल के गमले भी लगा सकते हैं। जबकि साइड वॉल और पीछे की बाउंड्री अधिकतम 2.4 मीटर ऊंची हो सकती है।
हर प्लॉट पर एक जैसे नियम लागू नहीं
सबसे अहम बात तो यह है कि दिल्ली में हर आवासीय प्लॉट पर एक समान बिल्डिंग बाय लॉज लागू नहीं होते हैं। शायद यही कारण है कि दिल्ली में आवासीय बिल्डिंग बनाने को लेकर तमाम दिक्कतें और शिकायतें सामने आती हैं। कॉलोनी, रोड की चौड़ाई, पास नक्शा, प्लॉट का साइज, लैंड यूज, स्पेशल एरिया, रेग्युलराइज कॉलोनी और मास्टर प्लान के प्रावधानों के आधार पर नियम बदल सकते हैं। एक और बात अगर आप प्लॉट पर नया मकान बनाने जा रहे हैं तो UBBL दस्तावेज के बजाय निर्माण के समय लागू वर्तमान मास्टर प्लान और कानूनी संशोधनों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ें।
