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कौन हैं कश्यप 'काश' पटेल? जिनको FBI चीफ के रूप में सीनेट की मिली मंजूरी

Who is Kash Patel: काश पटेल को एफबीआई प्रमुख के रूप में सीनेट की मंजूरी मिल गई है। यानी एफबीआई के नए चीफ कश्यप काश पटेल ही होंगे। क्या आप जानते हैं कि काश पटेल कौन हैं? जिन्होंने अमेरिकी सीनेट में 'जय श्रीकृष्ण' कहकर दिल जीत लिया था। पटेल का कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा में लंबा करियर रहा है। इस रिपोर्ट में आपको उनसे जुड़ी कई अहम बातें बताते हैं।

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एफबीआई निदेशक के रूप में काश पटेल को सीनेट ने दी मंजूरी।

Kash Patel gets Senate approval as FBI Chief: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की ओर से एफबीआई प्रमुख (FBI Chief) के तौर पर नामित कश्यप 'काश' पटेल (Kashyap Kash Patel) के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सीनेट ने काश पटेल को एफबीआई प्रमुख के रूप में मंजूरी दे दी है। यानी आधिकारिक तौर पर अब काश पटेल एफबीआई के नए चीफ होंगे।

काश पटेल को एफबीआई प्रमुख के रूप में सीनेट की मंजूरी

सी-स्पैन के अनुसार, अमेरिकी सीनेट ने संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के निदेशक के रूप में भारतीय मूल के काश पटेल के नामांकन को मंजूरी दे दी है। सी-स्पैन के अनुसार, पटेल ने 51/47 वोटों के साथ पुष्टि प्राप्त की। सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेट्स के विरोध के बावजूद यह हुआ। डेमोक्रेट्स ने विरोध के दौरान ये चेतावनी दी थी कि पटेल, एक कट्टर रिपब्लिकन, राष्ट्रपति के कथित राजनीतिक दुश्मनों को निशाना बनाने के लिए एजेंसी का उपयोग कर सकते हैं।

कौन हैं काश पटेल?

पटेल का कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा में लंबा करियर रहा है। उन्होंने एक सार्वजनिक वकील के रूप में शुरुआत की, राज्य और संघीय अदालतों में हत्या से लेकर वित्तीय अपराधों तक के जटिल मामलों की सुनवाई की। बाद में वे न्याय विभाग (DOJ) में चले गए, जहां उन्होंने आतंकवाद के अभियोजक के रूप में काम किया। उनके पास अल-कायदा और आईएसआईएस से जुड़े अपराधियों के अभियोजन की जिम्मेदारी रही।

पटेल के करियर में टर्निंग प्वाइंट 2019 में आया जब उन्हें ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में एंट्री हुई। बाद में ट्रंप के राष्ट्रपति पद के अंतिम महीनों के दौरान कार्यवाहक रक्षा सचिव के चीफ ऑफ स्टॉफ के रूप में नियुक्त किया।

10 साल का कार्यकाल पूरा करते हैं एफबीआई निदेशक

एफबीआई निदेशक 10 साल का कार्यकाल पूरा करते हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है। सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में नियुक्त क्रिस रे ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के अंत में इस्तीफा दे दिया, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें बर्खास्त करने का वादा किया था। मंगलवार को, पटेल ने मजबूत रिपब्लिकन समर्थन के साथ सीनेट में एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक वोट को मंजूरी दे दी, जैसा कि द न्यू यॉर्क पोस्ट ने बताया।

सीनेट ने नामांकन को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी लाइनों के साथ 48-45 वोट दिए, जिससे पटेल को गुरुवार को अंतिम मंजूरी मिलने से पहले 30 घंटे की बहस शुरू हो गई, द न्यू यॉर्क पोस्ट ने सूत्रों का हवाला देते हुए बताया।

अमेरिकी सीनेट में जब काश पटेल ने कहा जय श्री कृष्ण

हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें भारतीय मूल के वकील पटेल सीनेट में सुनवाई से पहले अपने माता-पिता के पैर छूने के लिए झुकते हुए दिखाई दे रहे थे। दूसरे वीडियो में पटेल अपने माता-पिता का परिचय कराते हुए 'जयश्री कृष्ण' बोलते हैं। वह कहते हैं, 'मैं अपने पिता प्रमोद और अपनी मां अंजना का स्वागत करना चाहूंगा, जो आज यहां बैठे हैं। वे भारत से यहां आए हैं। मेरी बहन निशा भी यहां हैं। वह भी मेरे साथ रहने के लिए महासागर पार से आईं हैं। आप लोगों का यहां होना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। जय श्री कृष्ण।'

पटेल कहते हैं कि वे न केवल अपने माता-पिता के सपनों को लेकर चल रहे हैं, बल्कि न्याय, निष्पक्षता और कानून के शासन के पक्ष में खड़े लाखों अमेरिकियों की उम्मीदों को भी आगे लेकर जा रहे हैं। पटेल ने बताया कि उनके पिता युगांडा में इदी अमीन की नरसंहारकारी तानाशाही से बचकर भाग गए थे, जहां तीन लाख पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को उनकी जातीयता के आधार पर मार दिया गया था 'सिर्फ इसलिए कि वे मेरे जैसे दिखते थे।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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