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बाइडन को इस्तीफा देना चाहिए, कमला हैरिस को अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति बनाना चाहिए...; जानें किसने दी ये सलाह

US Politics: अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में कमला हैरिस को मिली हार के बावजूद उन्हें राष्ट्रपति बनाने की मांग उठ रही है। एक पूर्व सहयोगी ने ये सलाह दी है कि जो बाइडन को इस्तीफा देना चाहिए और हैरिस को अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति बनाना चाहिए। आपको बताते हैं कि आखिर माजरा क्या है।

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क्या चुनाव में हार के बावजूद अमेरिका की राष्ट्रपति बनेंगी कमला हैरिस?

World News: अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में करारी हार के बावजूद क्या कमला हैरिस अमेरिका की राष्ट्रपति बन सकती हैं? ये सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि जो बाइडन को इस्तीफा देकर कमला हैरिस को प्रेसिडेंट बनाने की सलाह दी गई है। अमेरिका की निवर्तमान उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के एक पूर्व कर्मचारी ने राष्ट्रपति जो बाइडन से इस्तीफा देने और हैरिस को देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनाने का आग्रह किया, भले ही यह थोड़े समय के लिए हो।

'जो बाइडन को अपना एक आखिरी वादा पूरा करना चाहिए'

उपराष्ट्रपति के पूर्व संचार निदेशक जमाल सिमंस ने रविवार को एक ‘टॉक शो’ के दौरान इसी तरह का सुझाव देने के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर कहा, 'जो बाइडन अद्भुत रहे हैं, लेकिन उन्हें एक आखिरी वादा पूरा करना चाहिए और परिवर्तन लाने वाला बनना चाहिए।'

'अगले 30 दिनों में राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे सकते हैं बाइडन'

‘सीएनएन’ के 'सिचुएशन रूम' में एक साक्षात्कार के दौरान सिमंस ने कहा, 'जो बाइडन एक असाधारण राष्ट्रपति रहे हैं, उन्होंने अपने बहुत से वादों को पूरा किया है। एक वादा बचा है जिसे वह परिवर्तनकारी राष्ट्रपति होने के नाते पूरा कर सकते हैं। वह अगले 30 दिनों में राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे सकते हैं और कमला हैरिस को अमेरिका का राष्ट्रपति बना सकते हैं।' उन्होंने कहा, 'इससे डोनाल्ड ट्रंप के लिए स्थिति बदल जाएगी और अगली महिला के लिए राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ना आसान हो जाएगा।'

एक सवाल के जवाब में सिमंस ने कहा कि अगर बाइडन ऐसा करते हैं तो यह सबसे अच्छी बात होगी। हैरिस (60) को पांच नवंबर के आम चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप से हार का सामना करना पड़ा है। ट्रंप 20 जनवरी 2025 को अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने वाले हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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