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हिजबुल्लाह के पेजर और वॉकी-टॉकी पर हमलों के पीछे इजरायल का हाथ था, PM नेतन्याहू ने किया कबूल

Israel vs Hezbollah: बीते सितंबर के महीने में लेबनान और सिरिया में हिजबुल्लाह के सदस्य जिन पेजर और वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करते थे, उनमें ब्लास्ट हुआ था। अब इजराली पीएम नेतन्याहू ने हिजबुल्लाह के पेजर और वॉकी-टॉकी हमलों में इजरायल की भूमिका को स्वीकार किया है। आपको सारा माजरा समझाते हैं।

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नेतन्याहू ने हिजबुल्लाह पेजर वॉकी-टॉकी हमलों में इजरायल की भूमिका स्वीकार की।

World News: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार की साप्ताहिक कैबिनेट बैठक के दौरान पहली बार स्वीकार किया कि हिजबुल्लाह के पेजर और वॉकी-टॉकी पर हमलों के पीछे इजरायल का हाथ था, जिसमें कम से कम 39 लोग मारे गए और 3,000 से ज़्यादा लोग घायल हो गए, जैसा कि द टाइम्स ऑफ इजरायल ने रिपोर्ट किया है।

नेतन्याहू ने पेजर और वॉकी-टॉकी हमले की ली जिम्मेदारी

17 और 18 सितंबर को किए गए हमलों में लेबनान और सीरिया में हिजबुल्लाह के सदस्यों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हज़ारों हैंडहेल्ड पेजर और सैकड़ों वॉकी-टॉकी को निशाना बनाया गया। नेतन्याहू ने कथित तौर पर कहा, "पेजर ऑपरेशन और [हिजबुल्लाह नेता हसन] नसरल्लाह का खात्मा रक्षा प्रतिष्ठान में वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक क्षेत्र में उनके लिए जिम्मेदार लोगों के विरोध के बावजूद किया गया।"

उन्होंने आईडीएफ और खुफिया प्रमुखों के साथ-साथ हाल ही में बर्खास्त किए गए रक्षा मंत्री योआव गैलेंट पर भी कटाक्ष किया। पिछले हफ्ते, नेतन्याहू ने विश्वास की कमी का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री योआव गैलेंट को बर्खास्त कर दिया और उनकी जगह इजरायल कैट्ज़ को नियुक्त किया, जो पहले विदेश मंत्री के रूप में कार्यरत थे।

इस हमले में कम से कम 39 लोगों की हो गई थी मौत

टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू और गैलेंट के बीच सरकार में रहने के दौरान कई बार टकराव हुआ था। इससे पहले, इजरायल ने हिजबुल्लाह को निशाना बनाकर किए गए हमलों की सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी नहीं ली थी, जिसमें 17 और 18 सितंबर को पेजर और वॉकी-टॉकी दो बार फट गए थे, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई थी। टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार लेबनान ने कहा कि हमले में लगभग 3,000 अन्य लोग घायल हुए थे। मृतकों की संख्या में नागरिकों और आतंकी समूह के सदस्यों के बीच कोई अंतर नहीं किया गया, तथा घायलों में लेबनान में तेहरान के राजदूत मोजतबा अमानी भी शामिल थे।

इसके बाद, विभिन्न मीडिया आउटलेट्स ने बताया कि यह हमला वर्षों से चल रहा एक अत्यंत परिष्कृत इजरायली खुफिया अभियान था, जिसमें हिजबुल्लाह को धोखा देकर समझौता किए गए उपकरण खरीदे गए थे।

नसरल्लाह सहित हिजबुल्लाह के कमांड ढांचे को किया नष्ट

विस्फोटों के बाद इजरायली हवाई हमलों की एक श्रृंखला शुरू हुई, जिसमें नसरल्लाह सहित हिजबुल्लाह के अधिकांश कमांड ढांचे को नष्ट कर दिया गया, तथा दक्षिणी लेबनान में इजरायल के उत्तरी सीमावर्ती समुदायों के लिए आतंकी समूह द्वारा उत्पन्न तत्काल खतरों को समाप्त करने के लिए सीमित जमीनी अभियान चलाया गया।

इससे पहले, लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की कि इजरायल-हिजबुल्लाह युद्ध में देश में मरने वालों की संख्या 3,000 को पार कर गई है। यह आंकड़ा नागरिकों और लड़ाकों के बीच अंतर नहीं करता है। आईडीएफ ने अनुमान लगाया था कि संघर्ष में लगभग 3,000 हिजबुल्लाह कार्यकर्ता मारे गए थे। लेबनान में अन्य आतंकी समूहों के लगभग 100 सदस्यों के भी मारे जाने की सूचना मिली थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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