इजरायली हेरॉन Mk II ड्रोन बढ़ाएगा भारतीय सेना की ताकत, रफ्तार देख कांप उठेंगे दुश्मन

भारत ने और इजराइली हेरॉन MK-II ड्रोन (Heron Drone) खरीदने की शुरुआत की है। भारत ऐसा ऑपरेशन सिंदूर के बाद लागू इमरजेंसी नियमों के तहत कर रहा है। सूत्रों ने कहा कि अब भारत में एडवांस्ड UAV बनाने पर भी बातचीत चल रही है। IAI द्वारा डेवलप किया गया, हेरॉन MK-II एक मीडियम-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (MALE) अनमैन्ड एरियल व्हीकल है जिसका मैक्सिमम टेक-ऑफ वेट 1,430 kg है। यह 45 घंटे की एंड्योरेंस, 35,000 ft की सर्विस सीलिंग और 150 knots की टॉप स्पीड देता है।

Authored by: रवि वैश्यUpdated Dec 4 2025, 10:23 IST
​हेरॉन ड्रोन 35,000 फीट की ऊंचाई पर 45 घंटे तक उड़ान भर सकता है​01 / 07

​हेरॉन ड्रोन 35,000 फीट की ऊंचाई पर 45 घंटे तक उड़ान भर सकता है​

इजरायली हेरॉन ड्रोन (heron drone) 1,430 किलोग्राम भार के साथ 35,000 फीट की ऊंचाई पर 45 घंटे तक उड़ान भरता है। चीन सीमा पर निगरानी के लिए तैनात, हेरान ड्रोन की क्षमताओं को 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत बढ़ाया जा रहा है। यह एक uav है यानी पायलट रहित विमान, जो निगरानी (surveillance),टोही (reconnaissance),निगरानी एवं लक्ष्य ट्रैकिंग के काम आता है।अधिक अवधि तक हवा में रहने की क्षमता होने से रणनीतिक जानकारी जुटाई जा सकती है।

इसकी अधिकतम रफ्तार 150 knots​Image Credit : Canva/facebook/social media02 / 07

इसकी अधिकतम रफ्तार 150 knots​

IAI द्वारा विकसित हेरान एमके-2 एक मध्यम ऊंचाई व लंबी दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम UAV है। यह लगातार 45 घंटों तक उड़ान भर सकता है और इसकी अधिकतम रफ्तार 150 knots है।

​इजराइली रक्षा कंपनी IAI ने Heron MK-II को विकसित किया है​Image Credit : Canva/facebook/social media03 / 07

​इजराइली रक्षा कंपनी IAI ने Heron MK-II को विकसित किया है​

इजराइल की रक्षा कंपनी IAI (Israel Aerospace Industries) ने Heron MK-II को विकसित किया है।चीन के साथ LAC पर तनाव के बाद, भारत ने 2021 में इमरजेंसी पावर के तहत हेरॉन MK-II ड्रोन खरीदना शुरू किया था।

​इसे MALE ड्रोन श्रेणी में गिना जाता है Image Credit : Canva/facebook/social media04 / 07

​इसे MALE ड्रोन श्रेणी में गिना जाता है

इसे Medium Altitude Long Endurance (MALE) ड्रोन श्रेणी में गिना जाता है यानी कि, यह मज़बूती से लंबे समय तक आकाश में रह सकता है, उच्च ऊंचाई पर उड़ सकता है।

लंबी दूरी की निगरानी के लिए तैनात Image Credit : Canva/facebook/social media05 / 07

लंबी दूरी की निगरानी के लिए तैनात

हेरान ड्रोन मुख्य रूप से भारत के पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर लंबी दूरी की निगरानी के लिए तैनात किए जाते हैं। बताते हैं कि यह तैनाती बेहद असरदार साबित हुई है। चूंकि इसका मुख्य उपयोग खुफिया जानकारी, सीमाओं की निगरानी, आतंकवाद व आतंक-रोधी गतिविधियों में होता है।

​प्रोजेक्ट चीता पर कामImage Credit : Canva/facebook/social media06 / 07

​प्रोजेक्ट चीता पर काम

वहीं भारतीय वायुसेना और रक्षा मंत्रालय मौजूदा हेरान बेड़े की निगरानी व लड़ाकू क्षमताओं को अपग्रेड करने के लिए प्रोजेक्ट चीता पर काम कर रहे हैं। जिससे सेना की ताकत में और इजाफा होगा।

​साझीदारी के जरिये भारत में एमके-2 बनाने पर फोकसImage Credit : Canva/facebook/social media07 / 07

​साझीदारी के जरिये भारत में एमके-2 बनाने पर फोकस

हाल में वर्षों ने भारत ने इनकी खरीद बढ़ाई है वहीं फोकस अब एचएएल और एलकाम के बीच साझीदारी के जरिये भारत में एमके-2 बनाने पर है ऐसा सूत्रों का कहना है।

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