इजरायली हेरॉन ड्रोन (heron drone) 1,430 किलोग्राम भार के साथ 35,000 फीट की ऊंचाई पर 45 घंटे तक उड़ान भरता है। चीन सीमा पर निगरानी के लिए तैनात, हेरान ड्रोन की क्षमताओं को 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत बढ़ाया जा रहा है। यह एक uav है यानी पायलट रहित विमान, जो निगरानी (surveillance),टोही (reconnaissance),निगरानी एवं लक्ष्य ट्रैकिंग के काम आता है।अधिक अवधि तक हवा में रहने की क्षमता होने से रणनीतिक जानकारी जुटाई जा सकती है।
IAI द्वारा विकसित हेरान एमके-2 एक मध्यम ऊंचाई व लंबी दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम UAV है। यह लगातार 45 घंटों तक उड़ान भर सकता है और इसकी अधिकतम रफ्तार 150 knots है।
इजराइल की रक्षा कंपनी IAI (Israel Aerospace Industries) ने Heron MK-II को विकसित किया है।चीन के साथ LAC पर तनाव के बाद, भारत ने 2021 में इमरजेंसी पावर के तहत हेरॉन MK-II ड्रोन खरीदना शुरू किया था।
इसे Medium Altitude Long Endurance (MALE) ड्रोन श्रेणी में गिना जाता है यानी कि, यह मज़बूती से लंबे समय तक आकाश में रह सकता है, उच्च ऊंचाई पर उड़ सकता है।
हेरान ड्रोन मुख्य रूप से भारत के पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर लंबी दूरी की निगरानी के लिए तैनात किए जाते हैं। बताते हैं कि यह तैनाती बेहद असरदार साबित हुई है। चूंकि इसका मुख्य उपयोग खुफिया जानकारी, सीमाओं की निगरानी, आतंकवाद व आतंक-रोधी गतिविधियों में होता है।
वहीं भारतीय वायुसेना और रक्षा मंत्रालय मौजूदा हेरान बेड़े की निगरानी व लड़ाकू क्षमताओं को अपग्रेड करने के लिए प्रोजेक्ट चीता पर काम कर रहे हैं। जिससे सेना की ताकत में और इजाफा होगा।
हाल में वर्षों ने भारत ने इनकी खरीद बढ़ाई है वहीं फोकस अब एचएएल और एलकाम के बीच साझीदारी के जरिये भारत में एमके-2 बनाने पर है ऐसा सूत्रों का कहना है।