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युद्ध विराम विवाद के बीच गाजा पर टूटा इजरायल का कहर; एयर स्ट्राइक में पत्रकार समेत 8 लोगों की मौत

युद्ध विराम विवाद के बीच इजरायल ने गाजा में एक बार फिर कहर बरपाया है। इजरायली एयर स्ट्राइक में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई है। युद्ध विराम का पहला अस्थायी चरण 2 मार्च को समाप्त हो गया। इजरायल ने वार्ता के दूसरे चरण को शुरू करने से इनकार कर दिया।

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इजरायल ने फिर गाजा में बरपाया कहर।

Israeli air strike in Gaza: गाजा के उत्तरी बेत लाहिया शहर पर शनिवार को इजरायली हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में स्थानीय पत्रकार भी शामिल हैं, तथा अन्य घायल हो गए। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हमास के नेता काहिरा में मध्यस्थों के साथ गाजा युद्ध विराम वार्ता कर रहे हैं।

इजरायली हवाई हमलों में गाजा पट्टी में आठ लोगों की मौत

गाजा पट्टी में इजरायली हवाई हमलों में कम से कम आठ लोग मारे गए, जिनमें एक स्थानीय रिपोर्टर भी शामिल है। फलस्तीनी चिकित्सकों ने यह जानकारी दी। इंडोनेशियाई अस्पताल ने बताया कि शनिवार को उत्तरी शहर बेत लाहिया के एक ही क्षेत्र में हुए दो हवाई हमलों में जान गंवाने वाले आठ लोगों के शव लाये गये। उत्तरी गाजा में आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख फरेस अवाद ने मृतकों में से एक की पहचान स्थानीय पत्रकार महमूद इस्लाम के रूप में की, जो ड्रोन उड़ा रहा था।

युद्ध विराम विवाद के बीच गाजा में इजरायली एयर स्ट्राइक

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चिकित्सकों ने बताया कि एक कार पर हुए हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। वाहन के अंदर और बाहर भी लोग हताहत हुए। प्रत्यक्षदर्शियों और पत्रकारों ने बताया कि कार में सवार लोग बेत लाहिया में अल-खैर फाउंडेशन नामक चैरिटी संस्था के लिए एक मिशन पर जा रहे थे। इज़रायली सेना की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई।

यह इजरायली हमला हमास के निर्वासित गाजा प्रमुख खलील अल-हय्या की काहिरा की यात्रा के दौरान हुआ है। उनकी यात्रा का उद्देश्य इजरायल के साथ विवादों को हल करना है, जिससे एन्क्लेव में लड़ाई फिर से शुरू होने का खतरा हो सकता है। यह घटना 19 जनवरी के युद्धविराम समझौते की कमजोरी दर्शाती है जिसने गाजा पट्टी में बड़े पैमाने पर लड़ाई को रोक दिया था।

युद्धविराम के बावजूद इजरायली गोलीबारी में मारे गए दर्जनों लोग

फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि युद्धविराम के बावजूद इजरायली गोलीबारी में दर्जनों लोग मारे गए हैं। गाजा के चिकित्सकों की ओर से बताई गई कुछ घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, इजरायली सेना ने कहा कि उसके सैनिकों ने अपने बलों के करीब या सेना के संचालन की जगह के पास जमीन पर बम लगाने वाले 'आतंकवादी खतरों' को नाकाम करने के लिए हस्तक्षेप किया।

युद्ध विराम का पहला अस्थायी चरण 2 मार्च को समाप्त हो गया। इजरायल ने वार्ता के दूसरे चरण को शुरू करने से इनकार कर दिया। इसकी जगह उनसे ने घोषणा की कि वह संघर्ष विराम के पहले चरण को रमजान और पासओवर [यहूदी त्योहार] या 20 अप्रैल तक बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन करता है। उसने कहा कि यह प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन के मध्यपूर्व दूत स्टीव विटकॉफ की ओर से आया है। हालांकि हमास ने इसका विरोध किया।

फिलिस्तीनी ग्रुप के मुताबिक यहूदी राष्ट्र का यह कदम गाजा युद्ध विराम समझौते के दूसरे चरण के लिए वार्ता को टालने की कोशिश है। दूसरे चरण में इजरायल का गाजा से पूरी तरह से हटना, स्थायी युद्ध विराम लागू होना और हमास की ओर से शेष बंधकों को रिहा करना शामिल है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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