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इजरायल से अब चीन ने कर दी ये अपील, UNSC में कहा- बंद करने होंगे सैन्य अभियान

World News: दुनियाभर में इस वक्त इजरायल की गतविधियों पर चर्चा गरमाई हुई है। अपने दुश्मनों को सबक सिखाने के लिए इजरयली सेना हर कदम उठा रही है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन ने अपील की है कि इजरायल स्थिति को और गंभीर नहीं बनाएं। चीन ने क्या कुछ कहा आपको बताते हैं।

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चीन ने UNSC में इजरायल से कर दी ये अपील।

China on Israel: हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का ऑपरेशन लगातार जारी है। मध्य पूर्वी देशों के बीच छिड़े इस संघर्ष में लेबनान, फिलिस्तीन, हमास, बेरूत को इजरायली सेना खुली चुनौती दे रही है। इस बीच चीन ने इजरायल से खुले तौर पर ये अपील की है कि वो अपने सैन्य अभियानों पर रोक लगा दे। आपको बताते हैं कि चीन ने इजरायल से क्या कुछ कहा है।

चीन ने इजरायल से UNSC में किया ये आग्रह

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गाजा पट्टी में मानवीय स्थिति पर चर्चा करने के लिए फिलिस्तीन-इजरायल मुद्दे पर एक सार्वजनिक बैठक की। बैठक में भाषण देते हुए चीन ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी के खिलाफ इजरायल के दुष्प्रचार पर कड़ा विरोध व्यक्त किया। साथ ही चीन ने इजरायल से स्थिति को और गंभीर बनाना बंद करने का आग्रह भी किया।

'इजरायल को बंद करने होंगे सैन्य अभियान'

चीन ने कहा कि पिछले साल अक्टूबर से गाजा पट्टी में संघर्ष और मध्य पूर्व की स्थिति सुरक्षा परिषद के कार्य का फोकस रही है। लेकिन, स्थिति में अब तक सुधार नहीं हुआ है, बल्कि यह और भी बिगड़ती जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय कानून का अधिकार कुछ देशों के लिए व्यर्थ प्रतीत होता है, और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून की निचली रेखा का बार-बार उल्लंघन किया गया है।

चीन ने इजरायल से मानवीय सहायता को हथियार बनाना बंद करने और गाजा पट्टी पर अपनी नाकाबंदी और मानवीय पहुंच प्रतिबंध हटाने का आग्रह किया है। चीन ने कहा कि इजरायल को गाजा पट्टी में सभी सैन्य अभियान बंद करने होंगे और गाजा पट्टी के लोगों के खिलाफ सामूहिक सजा समाप्त करनी होगी। साथ ही हम सुरक्षा परिषद के हाशिए पर जाने को नजरअंदाज नहीं कर सकते।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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