दुनिया

Israel Hamas War: बच्चों को भून डाला, नवजातों के रेते गले..., इजराइल ने दुनिया को दिखाईं हमास की क्रूरता की तस्वीरें

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 13, 2023, 09:13 AM IST

Israel Hamas War: जब अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन इजराइल पहुंचे तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें कुछ तस्वीरें दिखाईं। ये तस्वीरें मासूम बच्चों की थी, जिनके सिरों को रेत दिया गया था और उन्हें जिंदा आग में भून दिया गया था। अब इन तस्वीरों को नेतन्याहू ने दुनिया की दिखाया है।

Image

नेतन्याहू ने एंटनी ब्लिंकन को दिखाईंं बच्चों की तस्वीरें

Photo : Twitter

Israel Hamas War: कहते हैं कि जंग के भी अपने कायदे होते हैं। जंग लड़ने वाले दोनों पक्ष कभी भी मासूमों और महिलाओं को निशाना नहीं बनाते। युद्ध के समय भी बर्बरता नहीं की जाती और इंसानी मर्यादाओं का ख्याल रखा जाता है। लेकिन हमास और इजराइल के बीच जारी जंग में जो हुआ, उसे देख, सुन और जानकार किसी के भी रौंगटे खड़े हो जाएंगे।

इजराइल पर हमास के हमले के बाद दरिंदगी की कुछ तस्स्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों को देखकर साफ पता चलता है कि हमास ने क्रूरता की उन हदों को भी पार कर दिया जो आतंकी संगठन ISIS या फिर तालिबान भी नहीं कर पाया। दरअसल, जब अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन इजराइल पहुंचे तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें कुछ तस्वीरें दिखाईं। ये तस्वीरें मासूम बच्चों की थी, जिनके सिरों को रेत दिया गया था और उन्हें जिंदा आग में भून दिया गया था। अब इन तस्वीरों को नेतन्याहू ने दुनिया की दिखाया है।

देखें तस्वीरें-

Israel war

Israel war

राक्षस भी ऐसा नहीं करते

इजराइली पीएम के आधिकारिक 'X'हैंडल पर इन तस्वीरों को पोस्ट किया है। लिखा है, ये कुछ तस्वीरें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को दिखाईं। आगे चेतावनी जारी करते हुए लिखा गया हे कि हमास के राक्षसों के हाथों बच्चों की हत्या और जलाए जाने की तस्वीरें खौफनाक हैं। हमास अमानवीय है। हमास ISIS है।

40 बच्चों के मिले थे सिर

इजराइल-हमास युद्ध के बीच जारी अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इजराइली डिफेंस फोर्सेस को 40 बच्चों के शव मिले थे। इन बच्चों का सिर कलम किया था। इस मुद्दे को गुरूवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी उठाया। उन्होंने कहा, मैंने कभी नहीं सोचा था कि आतंकवादियों की तरफ से बच्चों के सिर काटे जाने की तस्वीरों की पुष्टि करूंगा। हालांकि, बाद में व्हाइट हाउस ने कहा कि बाइडेन और अन्य अधिकारियों ने इन तस्वीरों को नहीं देखा है। इसके कुछ घंटे बाद ही इजराइल ने बच्चों की तस्वीरें दुनिया के सामने रखी हैं। इजराइल ने बताया कि ये तस्वीरें उन्होंने ब्लिंकन को भी दिखाई हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article